मोदी से पंगा लेने वाले आईपीएस संजीव भट्ट को हत्या के मामले में उम्रकैद

हिरासत में मौत के मामले में गुजरात की जामनगर कोर्ट ने बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट और उनके सहयोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है. साल 1990 में जामनगर में भारत बंद के दौरान हिंसा हो गई थी. उस दौरान संजीव भट्ट जामनकर के एएसपी थे. हिंसा के दौरान 133 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

बताया जाता है न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी. उस वक्त भट्ट और उनके साथियों पर आरोपी के साथ मारपीट करने का आरोप लगा था. न्यायिक हिरासत में मौत के इस मामले में संजीव भट्ट और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया था. बताया जाता है कि उस दौरान गुजरात सरकार ने उन पर मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं दी थी. 2011 में राज्य सरकार ने भट्ट के खिलाफ ट्रायल की अनुमति दे दी.

गुजरात दंगे के लिए मोदी को दोषी ठहरा चुके हैं भट्ट

1988 बैच के आईपीएस अधिकारी भट्ट को सेवा से ‘अनधिकृत रूप से अनुपस्थित’ रहने के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अगस्त 2015 में बर्खास्त कर दिया था. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया था कि वह गांधीनगर स्थित मोदी के आवास पर 27 फरवरी 2002 को आयोजित बैठक में शामिल थे.

इसमें उन्होंने दावा किया था कि बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी शीर्ष पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया था कि गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाने की घटना के बाद आक्रोशित हिंदुओं को अपना बदला पूरा करने दें. हालांकि शीर्ष अदालत ने उनके दावे को खारिज कर गोधरा के बाद हुए दंगों की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित कर दी थी.