लॉकडाउन के दौरान खाने पीने की चीज़ो में खूब मची लूट, सरकारी आंकड़ों से खुलासा

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कोरोना काल के बीच एक और बुरी खबर है. देश में महंगाई बढ़ गई है. खास तौर पर खाने पीने की चीजों की महंगाई दर तेजी से बढ़ी है. एक तरफ महा मंदी और नौकरियां जाना और दूसरी तरफ महंगाई में उछाल अर्थशास्त्रियों के लिए भी पहेली है. महंगाई दर बढ़ने के आंकड़े खुद सरकार ने जारी किए हैं. खाद्य पदार्थ महंगे होने से खुदरा मुद्रास्फीति जून में बढ़कर 6.09 प्रतिशत पर पहुंच गयी.

सरकार के सोमवार को जारी आंकड़े के अनुसार पिछले महीने में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 7.87 प्रतिशत हो गयी. पिछले साल जून महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 3.18 प्रतिशत थी.

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सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि मुद्रास्फीति का आंकड़ा कोरोना वायरस महामारी के कारण पाबंदियों की वजह से सीमित संख्या में बाजारों से एकत्रित आंकड़ों पर आधारित है.

बयान के अनुसार हालांकि जो आंकड़े लिये गये हैं, राज्य स्तर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का अनुमान सृजित करने के लिये पर्याप्तता मानदंड को पूरा नहीं करते. सरकार ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये ‘लॉकडाउन’ के कारण अप्रैल और मई का पूरा सीपीआई आंकड़ा जारी नहीं किया है

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बता दें कि जून 2019 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 3.18 प्रतिशत थी. सरकार ने देश में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की पृष्ठभूमि में अप्रैल और मई के लिए छोड़े गए सीपीआई डाटा को जारी किया था. मई माह के दौरान खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति 1.13 फीसदी रही थी. इससे एक महीना पहले अप्रैल में यह 2.55 फीसदी थी.


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