कांग्रेस से सिंधिया का इस्तीफा, ये है तीन पीढ़ियों का दलबदल का इतिहास

पीएम मोदी और उनके करीबी नेताओं ने इस बार सभी होली मिलन समारोह किसलिए रद्द किए थे अब पता चलने लगा है. अगर होली मिलन समारोह होता तो ये खेल मुमकिन नहीं था. पीएम मोदी ने जब सब होली की मस्ती में मस्त थे बड़ा कार्ड खेला और मध्यप्रदेश की सरकार गिरा दी.

चुनाव रैली के दौरान पूजा का नारियल फेंक देने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया अब कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके हैं. सिंधिया ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा भेजा. ये सिंधिया परिवार का कांग्रेस से तीन पीढी में तीसरा इस्तीफा है. इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया और उससे पहले उनकी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके है. ग्वालियर राजघराने में ज्योतिरादित्य सिंधिया के दादा जीवाजी राव सिंधिया पर महात्मागांधी की हत्या को लेकर उंगलियां भी उठ चुकी हैं. गोडसे ने जिस पिस्तौल से महात्मा गांधी की जान ली वो जीवाजीराव सिंधिया की ही थी.   

हाल के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पार्टी को बेहद कम सीटें दिसाने वाले और लोकसभा  खुद चुनाव हार जाने वाले सिंधिया मध्यप्रदेश में पद की चाह में छटपटा रहे थे. उन्हें न तो कमलनाथ ने उपमुख्यमंत्री बनाया न उनके नजदीकियों को अहम मंत्रालय दिए. इसका फायदा बीजेपी ने उठाया और माना जा रहा  है कि राज्यसभा की सदस्यता के प्रलोभन में सिंधिया  बीजेपी की डाली घास खा ली. सिंधिया ने खुद ट्वीट कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी है. सिंधिया के इस्तीफे के बाद उनके खेमे के 20 कांग्रेस विधायकों ने भी इस्तीफे दे दिए हैं. अपने इस्तीफे में सोनिया गांधी से ग्वालियर के राजकुमार ने कहा कि कांग्रेस के अंदर रहकर अब लोगों की सेवा नहीं की जा सकती.

ये भी पढ़ें :  हमलों से पीड़ित यूपी बिहार के लोगों का गुजरात छोड़ना शुरू, गुजरात के 5 जिलों में आफत

सिंधिया के साथ पार्टी छोड़ने वाले 20 विधायकों में पांच मंत्री भी शामिल हैं, जिन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष को अपने इस्तीफे भेज दिए हैं. ये विधायक कर्नाटक में हैं और वहीं से बाकायदा एक तस्वीर भी जारी की गई है. इन इस्तीफों के साथ ही कमलनाथ सरकार के जाने की पटकथा फाइनल हो गई है. सिंधिया के इस फैसले को कांग्रेस ने गद्दारी बताया है और कहा है कि अब मध्य प्रदेश में हमारी सरकार नहीं बच पाएगी.

मोदी से मुलाकात

इस्तीफा देने से पहले सिंधिया दिल्ली में सुबह अपने आवास से निकलकर सीधे गृहमंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे और इसके बाद शाह के साथ ही वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पहुंच गए. पीएम के आवास पर सिंधिया की बैठक सुबह 10.45 बजे शुरू हुई.

ये भी पढ़ें :  अदालत ने कहा कि नागरिकता साबित करने के लिए वोटर आईडी काफी, अमित शाह की बात गलत ?

करीब एक घंटे तक पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच बैठक चली. पीएम मोदी से मुलाकात के बाद सिंधिया अमित शाह की कार में बैठकर ही बाहर निकले. इससे पहले सिंधिया अपने आवास से अकेले खुद कार चलाकर अमित शाह के घर पहुंचे थे, जहां से अमित शाह के काफिले में लोक कल्याण मार्ग पर पीएम आवास पहुंचे. पीएम मोदी से मुलाकात के बाद ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.

सिंधिया आज ही बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. इतना ही नहीं, जिस सम्मान के लिए सिंधिया कांग्रेस में लड़ रहे थे, वो सम्मान उन्हें बीजेपी में दिया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी राज्यसभा भेज सकती है और इस तरह उन्हें संसद सत्र के बाद कैबिनेट विस्तार कर मोदी सरकार में शामिल किया जा सकता है.

इसका मतलब ये हुआ कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिरना तय है. बीजेपी सूत्रों का इस संदर्भ में कहना है कि कांग्रेस के बागी विधायक विधानसभा अध्यक्ष को आज ही अपने इस्तीफे भेज सकते हैं. ऐसे विधायकों की संख्या 20 हो सकती है. यानी अगर ऐसा होता है तो कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ जाएगी और इसके बाद शिवराज सिंह चौहान सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें :  शादी की उम्र नहीं हुई तो क्या, लिव इन में रहो, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

इस बीच गवर्नर कलराज मिश्रा को होली की छुट्टियां रद्द करके भोपाल बुला लिया गया है. सिंधिया के पाले में आते ही बीजेपी ने सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. आज बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के साथ बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक भी बुलाई गई है. इस बैठक में मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सरकार बनाने को हरी झंडी दी जाएगी.

मध्य प्रदेश में 230 विधानसभा सीटें हैं. यहां 2 विधायकों का निधन हो गया है. इस तरह से विधानसभा की मौजूदा शक्ति 228 हो गई है. कांग्रेस के पास कुल 121 विधायकों का समर्थन हासिल था, जिनमें से 20 ने इस्तीफे दे दिए हैं. यानी अब कांग्रेस के पास 101 विधायकों का ही समर्थन रह गया है. जबकि बीजेपी के पास अपने 107 विधायक हैं.

20 विधायकों के इस्तीफे के बाद विधानसभा की संख्या 208 रह जाएगी, जिसके लिहाज से बहुमत के लिए 105 विधायकों की जरूरत होगी. ऐसे में ताजा ताकत के हिसाब से बीजेपी कांग्रेस से आगे है और उसके पास सरकार बनाने का मौका है.