‘मेरे प्यारे बहके हुए हिंदुओ’- अलीगढ़ रेप केस में हिंदूवादियों पर पत्रकार का वायरल फेसबुक पोस्ट

मेरे प्यारे बहके हुए हिंदुओ,
कल से तुमने मेरा जीना मुश्किल किया हुआ है. तरह तरह के संदेश, पूछ रहे हो कि चुप क्यों हैं… अब चुप क्यों हैं ? … इसके बाद कहते हो कि बच्ची का नाम ट्विंकल है आसिफा नहीं इसलिए तुम्हारे मुंह पर ताला लगा हुआ है. एक मोहतरमा ने लिखा कि हमने फेवीकोल पी लिया है. कोई कह रहा है कि हम हत्यारों और बालात्कारियों को शांतिदूत मानते हैं. अब इतने के बाद तो बोलना बनता है. बिना ये परवाह किए कि तुम्हें बुरा लगेगा. बिना ये सोचे कि इसमें तुम्हारा कुसूर नहीं है. तुम्हारा भेजा निकालकर नफरत का गोबर भर दिया गया है जो कि सूख चुका है और सूखा गोबर हथोड़े से भी मुश्किल से टूटता है मुझे बोलना पड़ेगा.


आसिफा और ट्विंकल में आप कहते हो कोई अंतर नहीं हैं मैं कहता हूं हां कई मामलों में अंतर नहीं है. जिन लोगों ने आसिफा को मंदिर जैसी पवित्र जगह पर बंदी बनाकर रखा और रेप किया उनके समर्थन में भी तिरंगे लहराकर जुलूस निकालने वाले लोग वही थे जिनकी नाकाबिल सरकार ने ट्विंकल के साथ हुए जघन्य कृत्य में बिना जांचे ही एलान कर दिया कि वो रेप नहीं था. आपने उसका विरोध किया ? आपने मंत्री या मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांगा ? आपने अगर ये झूठ था तो अफसरों को बर्खास्त करने की मांग की? अगर रेप नहीं हुआ और अफसर सही थे तो पोस्को लगाने का सबब पूछा ? 


आपने क्यों नहीं पूछा कि एक लड़की से रेप, और उसके बाप की हत्या के आरोपों में पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की थी. उस बलात्कारी और हत्या आरोपी शख्स के खिलाफ एक्शन की मांग के लिए एक बेटी को लखनऊ जाकर आत्मदाह करने जैसा कदम क्यों उठाना पड़ा क्यो नहीं पूछा ? इसलिए क्योंकि आरोपी आपकी ही पार्टी का विधायक कुलदीप सिंह था ? तब नहीं पूछा तो तीन दिन पहले क्यों नहीं पूछा जब सांसद साक्षी महाराज उसी कुलदीप सिंह से जेल में मिलने गया और उसे धन्यवाद कहा. बलात्कारियों के इससे बढ़ावा नहीं मिलता ? आप के मुंह में दही जमा था क्या जब साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि आसाराम बापू निर्दोष है और एक दिन बाहर आएगा ? आपको नहीं लगता कि ये बलात्कारियों को सामाजिक संरक्षण देने का मामला है. तब भी आपके मुंह से बोल क्यों नहीं फूटे जब ट्विंकल के रेप के बाद सूर्यदेव शाही नाम के मंत्री ने कहा कि ऐसे मामले होते रहते हैं? जब निर्भया की मां चार दिन पहले कह रही थी कि सात लाल हो गए सरकार कुछ करे ताकि जल्दी फांसी हो सके तो आपने कुछ नहीं कहा. @girijeshv 


आपको बुरा लग रहा होगा लेकिन हमें बुरा लगता है क्योंकि आप इन सभी पातकियों, पापियों, दुष्टों और निकम्मों को बचाने के लिए अजीब तरह की राजनीति हरकतें करते हैं. आप जानबूझ के एक रेप के मामले को धर्म से जोड़ते हैं ताकि सरकारी निकम्मेपन के बारे में बात ही न हो. आप सेक्युलर लोगों को निशाना बनाते है जैसे हत्याएँ और बलात्कार के बारे में किसी गीता रामायण और कुरान में लिखा हो. 


अब तो शर्म कर लो, सुधर जाओ, नींद से जागो, नन्ही बच्ची की हत्या हुई है. उसके साथ दुनिया के क्रूरतम अपराध को अंजाम दिया गया है. और तुम हो कि राजनीति से आगे सोचने को तैयार नहीं हो. अपने आकाओं और नेताओं के लिए इतना तो मत गिरो. थोड़ा सही गलत का विवेक जागृत करो. हिंदू बनो हिंदूवादी मत बनो. आपके अंदर जैसे ही हिंदूवाद का कीड़ा घुसता है वो सबसे पहले आपके अंदर के धर्मात्मा हिंदू को मारता है.

ठीक वैस ही जैसे तालिबानी मानसिकता इस्लाम की हत्या करती है और धार्मिकता के चलते बुद्ध के अनुयायी भी हिंसा की सारी सीमाएं तोड़ देते हैं. दुनिया उदाहरणों से भरी पड़ी है. पहचान की बीमारी मार देती है. आदमी बनो, वैसे आदमी बनो जैसा धर्म ग्रंथों में लिखा है. हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई मत बनो. ब्राह्मण ठाकुर बनिये मत बनो. हमसे नहीं उनसे सवाल पूछो जो जिम्मेदार हैं. हमारा पीछा छोड़ो. हमें कोस कर असल दोषियों को कवर फायर मत दो. जै राम जी की.

पत्रकार गिरिजेश वशिष्ठ का फेसबुक पोस्ट