राहुल गांधी को न्यूनतम आय का आइडिया देने वाला अर्थशास्त्री गिरफ्तार

दुनिया के जाने माने अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़ को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. भोजन के अधिकार के लिए संघर्ष करने वाले ज्यां द्रेज़ उन अर्थशास्त्रियों में शामिल हैं जिन्होंने राहुल गांधी को न्यूनतम आय योजना न्याय का आईडिया दिया है. उन्होंने तड़क भड़क की ज़िन्दगी छोड़ कर ग़रीबों के लिए काम किया और भारत की नागरिकता ले ली.’

पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है और पूछताछ कर रही है. पुलिस का कहना है कि द्रेज़ बग़ैर पूर्व अनुमति के गढ़वा ज़िल के विष्णुपुर में भोजन के अधिकार पर एक जनसभा में बोल रहे थे. पुलिस का कहना है कि द्रेज़ और उनके साथियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है.

भोजन का अधिकार आन्दोलन चलाने वाले या उन्हें समर्थन देने वाले यह मानते हैं कि हर किसी को भरपेट भोजन मिलना ही चाहिए, यह मनुष्य का बुनियादी हक है औ मानवाधिकार की श्रेणी में आता है. हर मनुष्य सम्मान के साथ जिए, इसके लिए भोजन आवश्यक है. भोजन का अधिकार किसी तरह की दया या दानशीलता का मामला नहीं है, यह मौलिक अधिकार है. इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑन इकोनॉमिक, सोशल एंड कल्चरल राइट्स ने 11 मानवाधिकारों में भोजन के अधिकार को शामिल कर रखा है.

सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने इस पर ट्वीट कर कहा है कि वह इस घटना से सदमे में हैं. उन्होंने लिखा है, ‘ज्यां द्रेज़ संत-अर्थशास्त्री हैं, वह नोबेल पुरस्कार पाने के हक़दार हैं, वह झुग्गी झोपड़ियों में रह कर ग़रीबों के लिए काम करते हैं, उन्होंने उन ग़रीबों के लिए किसी भी दूसरे अर्थशास्त्री से ज़्यादा लिखा है और काम किया है.

यूरोपीय देश बेल्जियम मे जन्मे ज्यां द्रेज़ विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर शोध करने वाले अर्थशास्त्री हैं, जिन्होंने भारत को अपनी कर्मभूमि चुना और यहीं बस गए, उन्होंने भारत की नागरिकता ले ली. उन्होंने ग़रीबी, भुखमरी, लिंग-भेद और उससे उपजे आर्थिक भेद-भाव, बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विषयों पर काम किया. उन्होंने ही नेशनल रूरल इंप्लायमेंट गारंटी स्कीम यानी नरेगा की सलाह दी थी और उसकी रूप-रेखा तय की थी. मनमोहन सिंह सरकार ने इसे शुरू किया तो ज्यां द्रेज़ ने ही उसे लागू किया था. वह भोजन के अधिकार आन्दोलन से जुड़े हुए रहे और जिस समय उन्हें हिरासत में लिया, वह इससे जुड़ी  सभा में ही बोल रहे थे.