सावधान : किसी वाट्सएप ग्रुप में रहना यानी जेल जाने का इंतज़ाम करना

व्हाट्सऐप ग्रुप में आपत्तिजनक मैसेज शेयर होने पर आप जेल भी जा सकते हैं. मध्य प्रदेश के राजगढ़ ज़िले जुनैद एक व्हाट्सऐप मैसेज के लिए पिछले पांच महीने से जेल में है. न तो जुनैद  को न घर वालों को पता है कि वो मैसेज क्या था. जुनैद के घरवालों का ये कहना है कि उन्होंने ये मैसेज नहीं भेजा था.

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ 21 वर्षीय जुनैद पर आपत्तिजनक मैसेज के आधार पर राजद्रोह का आरोप लगा  है.

पुलिस का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराए जाने के समय जुनैद इस व्हाट्सऐप ग्रुप के एडमिन थे. जबकि जुनैद के परिवारवालों का कहना है कि जुनैद डिफॉल्ट एडमिन बन गए क्योंकि पहले वाले एडमिन ने ग्रुप छोड़ दिया था.

इस मामले से आप समझ सकते है कि व्हाट्सऐप एडमिन होना कितना खतरनाक है. जम्मू और कश्मीर के एक ज़िले में तो व्हाट्सऐप एडमिन का रजिस्ट्रेशन करना ज़रूरी कर दिया गया है. दूसरी तरफ़, व्हाट्सऐप प्लेटफ़ॉर्म की क़ानूनी जिम्मेदारी पर सरकार और सुप्रीम कोर्ट में बहस चल रही है.”

खैर जुनैद पर आते हैं. बगैर आपराध में भूमिका के व्हाट्सऐप एडमिन को पांच महीने तक जेल में रखना सही कैसे हो सकता है. सवाल उठता है कि अगर व्हाट्सऐप एडमिन को जेल तो व्हाट्सऐप पर एक्शन क्यों नहीं.

मध्य प्रदेश के राजगढ़ के तालेन के रहने वाले जुनैद ख़ान बीएससी सेकेंड ईयर के छात्र हैं. पुलिस ने उन्हें 15 फरवरी, 2018 को व्हाट्सऐप ग्रुप में आपत्तिजनक मैसेज फारवर्ड होने के आरोप में गिरफ्तार किया. जुनैद के घरवालों का कहना है, “ये मैसेज एक नाबालिग ने फॉरवर्ड किया था. लेकिन इसकी शिकायत होते ही ग्रुप का एडमिन इससे बाहर हो गया. उसके बाद दो अन्य लोग भी बाहर हो गए जिसकी वजह से जुनैद ग्रुप अपने आप एडमिन बन गया.”

 

“इस पूरी घटना के दौरान वह तालेन से बाहर रतलाम में था जहां पर वह अपने किसी रिश्तेदार की शादी का कार्ड बांट रहा था.”

“जुनैद के लौटने के बाद उनके ख़िलाफ आईटी एक्ट के साथ, राजद्रोह का मामला दर्ज कर दिया गया. जेल में होने की वजह से जुनैद बीएससी की परीक्षा भी नहीं दे पाया. वहीं एक अन्य आईटीआई की परीक्षा उसने जेल में ही दी.”

क्या कहता है क़ानून?

आईपीसी और आईटी एक्ट के तहत धार्मिक या राजनीतिक रूप से आपत्तिजनक संदेश फैलाने पर क़ानूनी जिम्मेदारी तय की जा सकती है.

एसडीओपी प्रकाश मिश्रा ने बताया, “इस मामले में चालान पेश किया जा चुका है. पूरी जांच के बाद ही चालान पेश किया गया है. अगर परिवार को लगता है कि इसमें कुछ गड़बड़ी है तो वह अदालत में सबूत पेश कर सकते है. आगे जो भी जांच होगी वह न्यायालय के आदेश पर ही हो सकती है.”

देश में इस समय 20 करोड़ सक्रिय व्हाट्सऐप यूजर्स हैं. ये देखा गया है कि ऐसे कई मामलों में होने वाली गिरफ़्तारियों के केंद्र में व्हाट्सऐप प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल था. सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया के ज़रिए हिंसा भड़काने से रोकने के लिए वो ये कदम उठाती है.