करोना पर चौंकाने वाला खुलासा, अब सोशल डिस्टेंसिंग भी फेल, अकेले घर में भी कोरोना का खतरा ?

कोरोना वायरस(Coronavirus) के मामले में दो गज की दूरी काफी नहीं है. ये वायरस एयरबॉर्न (AIRBORN) है और घर बैठकर भी ये बीमारी आपको लग सकती है. ये खबर उस दिन आई है जब रूस को पछाड़कर भारत कोविड-19 से प्रभावित होने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है. सरल शब्दों में कहें तो सोशल डिस्टेंसिंग बहुत कारगर तरीका नहीं है और किसी से दो गज की दूरी बनाने के बावदूद आप इसका शिकार हो सकते हैं. तब भी जब आप सड़क पर या पार्क में अकेले हों.

ये चौंकाने वाले और डरावने आंक़ड़े 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में जाहिर किए हैं. उन्होंने पाया कि नोवेल कोरोना वायरस के छोटे-छोटे कण हवा में भी जिंदा रहते हैं और वे भी लोगों को संक्रमित कर सकते हैं.

इन 239 वैज्ञानिकों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को एक खुला पत्र लिखा है. इन सभी वैज्ञानिकों ने दावा किया कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं, जिससे यह माना जाए कि इस वायरस के छोटे-छोटे कण हवा में तैरते रहते हैं, जो लोगों को संक्रमित कर सकते हैं. यह लेटर साइन्टिफिक जर्नल में अगले सप्ताह प्रकाशित होगा.

उधर हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन को लेकर भी खतरनाक खबर है. कोरोना के मामले में ये दवा बिल्कुल काम नहीं करती और डब्लूएचओ ने अंतिम रुप से इसके ट्रायल बंद कर दिए हैं.

इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस वायरस के फैलने के तरीकों को साफ करते हुए कहा था कि इस वायरस का संक्रमण हवा से नहीं फैलता है. WHO ने तब साफ किया था कि यह खतरनाक वायरस सिर्फ थूक के कणों से ही फैलता है. ये कण कफ, छींक, हंसने और बोलने से शरीर से बाहर निकलते हैं. थूक के कण इतने हल्के नहीं होते जो हवा के साथ यहां से वहां उड़ जाएं. वे बहुत जल्द ही जमीन पर गिर जाते हैं. लेकिन अब रिसर्च कुछ और कहती है.

ये भी पढ़ें :  ट्रंप के राज में विकसित से विकासशील देश बन गया अमेरिका, अब भारत की मदद बंद करेंगे

लेकिन ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में छपी एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों का नया दावा अब कुछ और ही कह रहा है. वैज्ञानिकों ने WHO से इस वायरस की रिकमंडेशन्स (संस्तुति) में तुरंत संशोधन करने का आग्रह किया है. बता दें दुनिया भर में इस वायरस का कोहराम लगातार बढ़ता ही जा रहा है.

अभी तक वैश्विक स्तर पर 1 करोड़ 15 लाख 44 हजार से ज्यादा लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं और 5 लाख 36 हजार से ज्यादा लोगों की इसके चलते मौत हो चुकी है. भारत में भी कोविड- 19 से संक्रमित होने के मामले में यह आंकड़ा 7 लाख के करीब पहुंच चुका है और यहां अब तक 19,286 लोगों की मौत हुई है. ऐसे में अगर इस वायरस के एयरबोर्न होने का दावा सही निकलता है तो यह लोगों की चिंताएं और बढ़ाने वाला होगा.

ये भी पढ़ें :  #MeToo में आरोप लगाने पर हाईकोर्ट की रोक, एक दूसरे की पहचान बताने पर भी स्टे

कोरोना वायरस से जूझ रही दुनिया के लिए अच्‍छी खबर है. विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने कहा है क‍ि कोरोना वायरस के खात्‍मे के लिए प्रभावी दवा के क्लिनिकल ट्रायल का पहला रिजल्‍ट दो हफ्ते में आए जाएगा.

समाचार एजेंसी रॉयटर ने WHO से इस नए दावे पर प्रतिक्रिया मांगी थी. लेकिन अभी उसने इस पर कुछ नहीं कहा है. न्यूयॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट के मुताबिक, ‘चाहे छींकने के बाद मुंह से निकले थूक के बड़े कण हों या फिर बहुते छोटे कण हों, जो पूरे कमरे में फैल सकते हैं. जब दूसरे लोग सांस खींचते हैं तो हवा में मौजूद यह वायरस शरीर में एंट्री कर उसे संक्रमित कर देता है.’

हालांकि अखबार में छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक हेल्थ एजेंसी ने कहा कि इस वायरस के हवा में मौजूद रहने के जो सबूत दिए गए हैं, उनसे ऐसे किसी नतीजे में फिलहाल नहीं पहुंचा जा सकता कि यह एयरबोर्न वायरस है.

WHO में संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण करने के लिए बनी टेक्निकल टीम के हेड डॉ. बेनेडेटा अलेगरैंजी के हवाले से न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी इस रिपोर्ट में लिखा, ‘हमने यह कई बार कहा है कि यह वायरस एयरबोर्न हो भी सकता है लेकिन अभी तक ऐसा दावा करने के लिए कोई ठोस और साफ सबूत हीं है.’