जो हजार साल में नहीं हुआ कोरोना ने कर दिखाया, ऐसे बदली ज़िंदगानी

कोरोना ने ज़िंदगी के मंच पर भले ही नकारात्मकता फैला दी हो लेकिन रंगधर्मिता की दुनिया को सृजनात्मक अंतर्दृष्टि देते हुए एक नए आयाम और विधा की रचना कर डाली. कुछ लोग इसे आभासी रंगमंच नाम दे रहे हैं पर दरअसल सही नाम रहेगा डिजिटल होम कंफर्ट थिएटर.

कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है. कहानी और कविता की तरह रंगमंच ने भी निर्बाध कायम रहने और बहने का मार्ग खोज लिया और कोरोना काल में एक बेहतरीन व्यावसायिक, कारगर और दूरगामी विकल्प बन कर ढूंढ कर अपनी यात्रा का आगाज व्यापक पैमाने पर कर दिया.

लेखक राजेश शर्मा जाने माने पत्रकार और मीडिया कर्मी हैं. अपनी कलम से कई टीवी प्रोजेक्ट और समाचारपत्रों को धार दे चुके हैं.

ऐसे ही जहां चाह, वहां राह की तलाश करते ‘द रूट्स इंडिया’ ग्रुप का हाल ही में हुआ नाटक ‘द परफेक्ट मैच’ देखने का मौका मिला. नाटक के निर्देशक प्रभजोत सिंह के अनुसार लेखन और रिहर्सल से लेकर इम्प्रोववइज़शन तक, सब इंटरनेट के माध्यम से ही हुआ. इसके बावजूद लगभग डेढ़ घंटे की एक रोचक कॉमेडी को नई तकनीक में ढालकर दर्शकों कोबांधे रखने में इसका मंचन सफल रहा.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोगों ने टिकट खरीद कर इसे अपने कंफर्ट जोन से बिना बाहर निकले इस ड्राइंग रूम डिजिटल नाटक का आनंद लिया. ना कोरोना का डर, ना ट्रैफिक का झंझट, समय अलग बचा. नाटक रिकार्डेड नहीं बल्कि स्टेजप्ले की तरह रियल टाइम में खेला गया और वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिये सिर्फ एक शहर तक सीमित रहने की बंदिश का टूटना व्यावसायिक तौर पर इसे एक सशक्त और कामयाब विकल्प बना सकता है बशर्ते कि उसमें कुछ ख़ास हो. मसलन, अच्छा विषय, कसी हुई स्क्रिप्ट और अभिनय जगत का कोई चर्चित नाम.

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‘द परफेक्ट मैच’ अमेरिका में रहने वाले और अपने गुरु में गहरी आस्था रखने वाले गुलशन वालिया की अपनी बेंगलुरु में रहने वाली बेटी गुंजन के लिए उचित वर तलाशने की कहानी है. वालिया अमेरिका में रहने के बावजूद भारतीय संस्कृति में रचा बसा है, टीका धारी है और गुरु जी के आदेश से सिर्फ’ व’ अक्षर से शुरू होने वाले नाम के लड़के से ही अपनी बेटी की शादी करना चाहता है.

पूरा घटनाक्रम कोरोना और लॉकडाउन के माहौल में इंटरनेट पर ही रिश्ता पक्का करने और इसी ‘व’ अक्षर के नाम के व्यक्ति की तलाश के इर्द-गिर्द गुना गया है. बेटी गुंजन संजीदा, समझदार और सामाजिक मायनों में जागरूक है जबकि बबली उत्तर भारत की तरफ पाए जाने वाले उन तमाम चलते फिरते करैक्टर्स का प्रतिनिधित्व करता है, जो प्रॉपर्टी डीलर से लेकर पीर, बावर्ची, भिश्ती, खर सब होते हैं और साइकिल से लेकर हवाई जहाज तक सब बेच लेते हैं. मूल मकसद रहता है किसी भी कीमत पर या किसी भी हालत में सौदा पटाना और अपनी कमीशन खाना. नाटक इसी सौदा पटाने के इर्द-गिर्द घूमता है, जहां बबली अलग-अलग संभावित दूल्हों को ‘टिकाने’ की कोशिश करता है.

तीनों प्रमुख पात्रों अरुण कुमार कालरा (गुलशन वालिया), विभूति तोमर (गुंजन वालिया) और बबली (प्रभजोत सिंह) ने अपने किरदारों को बखूबी निभाया लेकिन सपोर्टिंग कलाकारों ने भी नाटक को विविधता प्रदान करते हुए नीरस नहीं होने दिया. संकेत अग्रवाल ने तीन किरदार, विवेक शर्मा ने दो और आदित्य मलिक तथा पर्ल अग्रवाल ने एक-एक किरदार निभाया.

वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने की जांच-पड़ताल करता यह नाटक समाज में फैली तमाम विसंगतियों और कुरीतियों, खासतौर से जेंडर बायस और युवाओं में संकीर्ण मानसिकता आदि के मुद्दे भी उठाता है लेकिन आज की ज्वलंत समस्या बने हुए धार्मिकता और व्यक्ति पूजा जैसे मुद्दों पर भी सोचने पर मजबूर करता है.

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गौरतलब है कि रंगमंच की दुनिया में इस तरह के और प्रयोग भी देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आरंभ हो चुके हैं और आने वाले समय में ऐसे दर्शकों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है. इतना जरूर है कि इसके लिए कुछ मूलभूत मुद्दे एकदम पुख्ता होने चाहिए. अच्छा विषय, कसी हुई स्क्रिप्ट, मंझा हुआ अभिनय, टेक्नीक पर पूरा कंट्रोल और सशक्त निर्देशन.

इसके अलावा अगर नाटक में कोई चर्चित नाम भी हो, भले ही वह गेस्ट अपीरियंस ही क्यों ना हो, तो सोने में सुहागा का काम करेगा. व्यावसायिक तौर पर यह सफलता के नए दरवाजे खोल सकता है क्योंकि बिना भारी-भरकम सेट का तामझाम लगाएं हर शो में देश-विदेश की ऑडियंस हासिल की जा सकती है और पूरी यूनिट को बिना एक से दूसरे शहर ले जाए लगातार शो खेले जा सकते हैं.

नई विधा होने के कारण नुक्कड़ नाटक और रेडियो नाटक की तरह यह डिजिटल होम कंफर्ट थिएटर भी समय के साथ ही इवॉल्व होगा लेकिन जो लोग इसे आसान समझ रहे हैं, उन्हें एक बात ध्यान में रखना जरूरी है. यह टीवी सीरियल या फिर फिल्मों जैसा आभास देने के बावजूद रंगमंच की मूल प्रक्रिया से बंधा हुआ है और वह है लाइव परफॉर्मेंस क्योंकि आप सिर्फ कैमरा के सामने ही नहीं बल्कि पूरी ऑडियंस के सामने लाइव है

…… और लाइव शो में रिटेक नहीं होता.