एक नज़र में जानिए आज मौजपुर हिंसा केस में क्या-क्या रहा, मृतकों की संख्या से सरकार अदालत के एक्शन तक सब

त्तर-पूर्व दिल्ली में सीएए विरोधी हिंसा में बुधवार सुबह तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है. मुस्तफाबाद हिंसा में घायल कई लोगों का यहां के अल हिंद अस्पताल में इलाज चल रहा है. मंगलवार देर रात सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टरों के एक दल ने दिल्ली हाईकोर्ट से दखल की अपील की. सुनवाई जस्टिस मुरलीधर के घर पर हुई. सुनवाई करने वाले जजों में जस्टिस एजे भंभानी भी शामिल थे. जजों ने पुलिस को आदेश दिया कि सुरक्षा के बीच घायलों को अल हिंद अस्पताल से जीटीबी या किसी अन्य हॉस्पिटल शिफ्ट किया जाए. दूसरी तरफ, एनएसए अजीत डोभाल ने देर रात हिंसा प्रभावित सीलमपुर इलाके का दौरा किया. उनके साथ दिल्ली के नए स्पेशल सीपी एसएन. श्रीवास्तव भी मौजूद थे.

दूसरी तरफ हिंसा संबंधी शिकायतों पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने के अनुरोध वाली एक याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है. यह याचिका पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला और अन्य ने दाखिल की है. जस्टिस एस. के. कौल और जस्टिस के. एम. जोसफ की एक बेंच के सामने याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया.

इस बीच  मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई. हबीबुल्ला, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और सामाजिक कार्यकर्ता बहादुर अब्बास नकवी ने यह याचिका दायर की है. इसमें सीएए को लेकर शाहीन बाग और राष्ट्रीय राजधानी के अन्य हिस्सों में जारी धरनों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग भी की गई है.

शीर्ष अदालत को शाहीन बाग से प्रदर्शनकारियों को हटाये जाने की मांग वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई करनी है. अपनी नई याचिका में हबीबुल्ला, आजाद और नकवी ने आरोप लगाया कि, ‘कपिल मिश्रा, जो भीड़ को हिंसा और तोड़फोड़ के वास्ते उकसाने वाले बयान देने के लिए जाने जाते है, ने मौजपुर-बाबरपुर मेट्रो स्टेशन के पास सीएए के समर्थन में एक रैली निकाली थी. इसी मेट्रो स्टेशन से दो किलोमीटर दूर जाफराबाद में शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहे थे.’

उधर एक फोरम ने दिल्ली हाईकोर्ट से अपील में कहा कि मुस्तफाबाद हिंसा में घायल हुए लोगों का उचित इलाज वहां के अल हिंद अस्पताल में संभव नहीं है. लिहाजा, मरीजों और डॉक्टरों को पुलिस सुरक्षा में जीटीबी या किसी अन्य अस्पताल में भेजा जाए. याचिका में कहा गया था कि अल हिंद अस्पताल में न तो पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं हैं और न ही वहां एंबुलेंस की व्यवस्था है. इसके बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और पुलिस को संबंधित आदेश जारी किए. दूसरी तरफ, होम मिनिस्टर अमित शाह ने बुधवार सुबह शाहदरा हिंसा में घायल डीसीपी अमित शर्मा के परिवार से फोन पर बातचीत की. शाह ने शर्मा की सेहत के बारे में उनके परिजनों से जानकारी ली.

उधर मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार देर रात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने हिंसा ग्रस्त सीलमपुर क्षेत्र का दौरा किया. वो पहले नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के डीसीपी वेद प्रकाश सूर्या के दफ्तर पहुंचे. यहां उन्होंने अधिकारियों से मीटिंग की. इसके बाद डोभाल सीलमपुर रवाना हो गए. उनके साथ दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक भी मौजूद थे. एनएसए ने हिंसा में मारे और घायल हुए लोगों के अलावा हिरासत में लिए गए आरोपियों के बारे में भी जानकारी ली.

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों पर काबू पाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार रात तक 24 घंटे के अंदर 3 बैठकें कीं. दिल्ली के नए विशेष आयुक्त (कानून व्यवस्था) एसएन श्रीवास्तव के साथ देर रात तक तीन घंटे बैठक चली. इसके बाद एनएसए अजित डोभाल हालात का जायजा लेने के लिए सीलमपुर पहुंच गए. दंगाग्रस्त इलाकों भजनपुरा, घोंडा, यमुना विहार, चांदबाग, करावल नगर सहित कई इलाकों में मंगलवार तड़के ही हिंसा शुरू हो गई थी. गुरु तेग बहादुर अस्पताल में 7 बजे से घायल पहुंचने लगे थे. हर 10-15 मिनट में गोली या पत्थरों से घायल कोई न कोई शख्स पहुंचता रहा.

अधिकारियों के मुताबिक, शाहीन बाग में सुप्रीम कोर्ट के वार्ताकार लोगों से बात कर रहे थे. वहां शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन की इमेज बनाए रखने के लिए दूसरी जगहों पर हिंसक प्रदर्शन की पटकथा लिखी गई. स्पेशल ब्रांच सूत्रों की ओर से दावा किया गया है कि ट्रम्प की भारत यात्रा को लेकर पहले से ही अंदेशा था कि माहौल को जान-बूझकर खराब किया जा सकता है. पुलिस सूत्रों का कहना है इस हिंसक घटना के पीछे बाहरी शक्तियां शामिल हो सकती हैं. इन मंसूबों को पूरा करने के लिए कम उम्र के युवाओं को मोहरा बनाया गया.