जाने माने वैज्ञानिक का दावा, वो टेंपर कर सकते है EVM, लेकिन जेल में डाल दिए जाएंगे

देश के जाने माने वैज्ञानिक और साइंस टैक्नोलॉजी को लोकप्रिय बनाने वाले गौहर रज़ा ने दावा किया है कि ईवीएम को आसानी टेंपर किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि मैं अगर ऐसा करके दिखाता हूं तो जेल में डाल दिया जाऊंगा. वोही क्या किसी और ने भी ये किया तो उसे चोर साबित कर जेल में डाल दिया जाएगा.

दरअसल वैज्ञानिक गौहर रजा 60वीं ग्रीष्म कालीन व्याख्यानमाला में बतौर वक्ता शामिल होने इंदौर आए थे. रजा वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर मंडराते खतरे विषय पर संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि विश्व के सभी विकसित देश ईवीएम को छोडक़र मतपत्र की तरफ लौट रहे हैं, तब हम ईवीएम से ही लोकतंत्र को चलाने पर अड़े हैं.

पिछले दिनों अमरीका की एसोसिएशन ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड मेडिसिन ने कहा कि ऐसी कोई मशीन नहीं है, जिसे टेंपर नहीं किया जा सके. चुनाव आयोग का दावा है ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन यह भी हकीकत है कि इस मशीन में लगने वाली चिप अमेरिका, जापान और अन्य देशों से बनकर आ रही है. ऐसे में यह सवाल भी खड़ा है कि जो देश चिप बना कर भेज रहे हैं, क्या वे ऐसी सुरक्षित मशीन नहीं बना सकते.

अमेरिका और अन्य देश हमसे चुनाव कराने के लिए तकनीक और मशीन नहीं मांगते. सवाल उठा, जब चुनाव आयोग ने ईवीएम हैक या टेंपर करने के लिए तीन दिन का वक्त दिया था तो आपके साथ अन्य वैज्ञानिक आगे क्यों नहीं आए? रजा ने कहा कि कोई वैज्ञानिक यह चेष्टा करेगा तो गौतम की तरह उसे चोर घोषित कर जेल में डाल दिया जाएगा.

पीएम मोदी की समझ पर उठाए सवाल

गौहर रजा ने कहा, प्रधानमंत्री का यह बयान कि भगवान गणेश के समय हमारे देश में प्लास्टिक सर्जरी होती थी. कर्ण स्टेम सेल का उदाहरण है, यह अपने आप में ही विज्ञान के प्रति अगंभीरता का प्रदर्शन है. कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथि का स्वागत आनंद मोहन माथुर, सुरेश नाहटा, शरद सोमपुरकर, एनके उपाध्याय व वैशाली खरे ने किया. कार्यक्रम का संचालन सुरेश उपाध्याय ने किया व आभार आलोक खरे ने माना. अतिथि को स्मृति चिह्न अपर कलेक्टर कैलाश वानखेड़े और सुनील चौरडिय़ा ने भेंट किए.

1947 में हमारी संपदा लूट ले गए अंग्रेज

रजा ने कहा कि 1947 में आजादी के वक्त अंग्रेज हमारी सारी संपदा लूट ले गए थे. गरीबी, अशिक्षा और भूखमरी की स्थिति थी. उस समय जवाहरलाल नेहरू ने फैसला लिया कि हम देश में विज्ञान के मंदिर बनाएंगे. हमारे देश के युवा वैज्ञानिक ब्रह्मांड को जीतने, मंगल ग्रह को खोजने, नासा पर पहुंचने का काम कर रहे थे. हाल के वर्षों में हमारी सरकार ने विज्ञान व टेक्नोलॉजी के बजट में कटौती कर विज्ञान के क्षेत्र में हो रही प्रगति पर ब्रेक लगा दिया. यदि हालात को संभाला नहीं गया तो आने वाली पीढिय़ां इसका खामियाजा भुगतेगी. विज्ञान में हमारी प्रगति पिछले 70 सालों में किए बेहतर कामों का परिणाम है. हमारे देश के युवा को विज्ञान से रोजगार मिला. कोई पकोड़े तलने का रोजगार नहीं चाहेगा.