5000 साल पुराना ये उपाय है सेनीटाइज़र से भी सौ गुना सस्ता और असरदार

इसामसीह का जन्म आज से 2020 साल पहले हुआ था ये बात उससे भी 2800 साल पहले की है. प्राचीन बेबीलोन में एक ऐसी चीज का अविस्कार हुआ जो आज भी हम सबकी जिंदगी का अहम हिस्सा है और आज जब कोरोना वायरस का इनफेक्शन फैल रहा है ये  वो चीज़ है जिस पर डॉक्टर सेनीटाजर से ज्यादा भरोसा करते हैं.

इस नायाब रसायनिक तरीके की शुरुआत 5000 साल पहले राख के साथ तेल को उबालकर हुई थी. आज जब आप इससे अपने हाथ साफ करते हैं तो सिर्फ जीवाणु और विषाणु मरते ही नहीं हैं बल्कि वो त्वचा से अलग होकर बह जाते हैं. ये जादुई चीज़ है साबुन.

आज जब सेनिटाइजर की बाजार में किल्लत है. तो ये बेहरस भी साथ साथ चल रही है कि साबुन बेहतर है या सेनिटाइजर.

डॉक्टर कहते ही नहीं साबुन पर सबसे ज्यादा भरोसा भी साबुन पर करते हैं. जब आप एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर से हाथ साफ करते हैं. तो वो उन जगहों के सभी बैक्टीरिया मार देता हैं जहां आप लगाते हैं लेकिन जब आप हाथ साफ करते हैं तो कोई न कोई कोना छूट ही जाता है

लेकिन जूसरी तरफ जब आप साबुन के साथ पानी का इस्तेमाल करते हैं तो साबुन के बुलबुले पूरे हाथ में तेजी से फैलते हैं. अगर कोई जिद्दी जीवाणु बच भी जाता है तो साबुन के साथ धोकर आप उसे अपने अंग से अलग कर देते हैं जबकि एल्कोहल आधारित सेनिटाइजर से अगर कोई जीवाणु बच जाता है तो वो आपके हाथ पर ही रहता है.

साबुन अपने अविस्कार के डेढ़सौ साल बाद ही काफी सोकप्रिय हो गया था. लोगों ने इसे अलग अलग तरीके से बनाना शुरू कर दिया था. 1550 में इजिप्ट में साबुन को जानवरों की चर्बी और तेल को कुछ क्षारीय लवणों के साथ मिलाकर बनाया जाने लगा था.

अधिकांश मैल तेल किस्म की होती है. ऐसे तेल वाले वस्त्र को जब साबुन के साथ मिलकर छोटी-छोटी गुलिकाएँ बन जाता है, जो कचारने से वस्त्र से अलग हो जाती है. ऐसा यांत्रिक विधि से हो सकता है अथवा साबुन के विलयन में उपस्थित वायु के छोटे-छोटे बुलबुलों के कारण हो सकता है. गुलिकाएँ वस्त्र से अलग ही तल पर तैरने लगती हैं.

साबुन के पानी में घुलाने से तेल और पानी के बीच का पृष्ठ तनाव बहुत कम हो जाता है. इससे वस्त्र के रेशे विलयन के घनिष्ठ संस्पर्श में आ जाते हैं और मैल के निकलने में सहायता मिलती है. मैले कपड़े को साबुन के विलयन प्रविष्ट कर जाता है जिससे रेशे की कोशिओं से वायु निकलने में सहायता मिलती है.

ठीक-ठीक धुलाई के लिए यह आवश्यक है कि वस्त्रों से निकली मैल रेशे पर फिर जम न जाए. साबुन का इमलशन ऐसा होने से रोकता है. अत: इमलशन बनने का गुण बड़े महत्व का है. साबुन में जलविलेय और तेलविलेय दोनों समूह रहते हैं. ये समूह तेल बूँद की चारों ओर घेरे रहते हैं. इनका एक समूह तेल में और दूसरा जल में धुला रहता है. तेल बूँद में चारों ओर साबुन की दशा में केवल ऋणात्मक वैद्युत आवेश रहते हैं जिससे उनका सम्मिलित होना संभव नहीं होता.