‘मेरे श्राप के कारण शहीद हेमंत करकरे को अमजद कसाब ने मार डाला था’

अमजद कसाब और उसके साथियों के साथ लडते हुए जांबाज अफसर और मुंबई एटीएस के प्रमुख हेमंत करकरे की मौत आतंकवादियों की गोली से ज़रूर हुई हो लेकिन इसका कारण कथित साध्वी प्रज्ञा का श्राप था. ये दावा खुद लोकसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से भोपाल से उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने किया है.  ने मुंबई आतंकी हमले के शहीद हेमंत करकरे को लेकर विवादित बयान दिया है. साध्वी ने एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे को श्राप देने का दावा किया है.

साध्वी ने एक सभा में कहा, ‘मैंने कहा तेरा (मुंबई एटीएस प्रमुख स्व. हेमंत करकरे) सर्वनाश होगा. ठीक सवा महीने में सूतक लगा है. जिस दिन मैं गई थी उस दिन इसके सूतक लग गया था. और ठीक सवा महीने में जिस दिन आतंकवादियों ने इसको मारा, उस दिन सूतक का अंत हुआ.’

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, ‘जो जांच आयोग बिठाया गया था उस आयोग के सदस्य ने हेमंत करकरे को बुलाया. आयोग्य के सदस्य ने करकरे से कहा जब तुम्हारे पास इनके खिलाफ सबूत नहीं है तो साध्वी जी को छोड़ दो.सबूत नहीं है तो इनको रखना गलत है, गैरकानूनी है. वो व्यक्ति (करकरे) कहता है मैं कुछ भी करूंगा, मैं सबूत लेकर आउंगा, बनाऊंगा, करूंगा, इधर से लाऊंगा, उधर से लाऊंगा लेकिन मैं साध्वी को नहीं छोड़ूंगा.’

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने आगे कहा, ‘ये उसकी कुटिलता थी, ये देशद्रोह था. यह धर्म विरुद्ध था. जब उसने मुझसे पूछा, तमाम सारे प्रश्न किए. क्यों? ऐसा क्यों हुआ?, वैसा क्यों हुआ? मैंने कहा मुझे नहीं पता, भगवान जाने. इस पर उसने कहा क्या मुझे यह सब जानने के लिए भगवान के पास जाना पड़ेगा. इस पर मैंने कहा बिल्कुल, अगर आपको आवश्यकता है तो आप जरूर जाइए.’

साध्वी ने कहा कि आप लोगों को विश्वास करने में थोड़ी देर लगेगी लेकिन मैंने कहा तेरा सर्वनाश होगा. मुझे इतनी यातनाएं दीं, इतनी गंदी गालियां दीं जो मेरे लिए असहनीय थीं. ठीक सवा महीने में सूतक लगता है. जब किसी के यहां मृत्यु होती है या जन्म होता है. तो जिस दिन मैंने देखा उस दिन इसका सूतक लग गया.

मालूम हो कि हेमंत करकरे 26/11 को मुंबई आतंकी हमले में आतंकियों की गोली का शिकार हो गए थे. करकरे के पास ही मालेगांव विस्फोट मामले की जांच थी. करकरे 1982 में आईपीएस अधिकारी बने थे. महाराष्ट्र के जॉइंट सीपी ने इनको एटीएस चीफ बनाया. 26 नवंबर 2009 को भारत सरकार ने हेमंत करकरे को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया था.