मोदी सरकार की एक और स्कीम फेल, लेना पड़ा यू टर्न

अनुभव की कमी और दूसरों को मूर्ख समझना , ये दो दुर्गुण है जिनसे मोदी सरकार को बार बार अजीबो गरीब हालत में धकेल दिया है. फ्लैक्सी फेयर का प्रस्ताव सालों से रेल मंत्रालय के पास आया उसने हर बार ठुकरा दिया.  लेकिन मोदी सरकार को लगा ये बुद्धिमानी वाला आइडिया है. आपाधापी में इसे लागू कर दिया. सोचा होगा कि लोग कहेंगे कितना दिमाग का काम किया है लेकिन इस दिमाग के काम ने मोदी सरकार का दिमाग खराब कर दिया है.

 

फ्लैक्सी फेयर के ज़रिये जनता से ज्यादा पैसे झटकने के चक्कर में मोदी सरकार फ्लैक्सी फेयर लेकर आई थी. नतीजा ये हुआ कि किराया आसमान पर पहुंच गया. उससे भी ज्यादा बुरा ये हुआ कि रेल्वे को नुकसान होने लगा क्योंकि ट्रेनें खाली जाती थी. सीएजी ने इस पर रेल्वे को फटकार लगाई. कहा घाटा हो रहा है.

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अब रेल्वे ने अपना ये अफलातूनी कदम वापस ले लिया है. सरकार एहसान जता रही है कह रही है मुसाफिरों को राहत देने के लिए कदम पीछे खींच रहे हैं.

रेलवे ने बताया कि मंत्रालय प्रयोग के रूप में कम भीड़भाड़ के दौरान कुछ ट्रेनों में अस्थायी रूप से फ्लेक्सी फेयर योजना बंद करने की तैयारी कर रहा है, क्योंकि ऐसा देखा गया कि इस दौरान 30 फीसदी से कम सीटें ही भरीं.

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ट्रेनों को लेकर हुआ बड़ा बदलाव, इस नियम को जानते हैं तो ही करें यात्रा वरना होगी परेशानी

फ्लेक्सी फेयर में पहली 10 फीसदी बर्थ सामान्य किराए पर बुक होती हैं. इसके बाद प्रत्येक दस फीसदी बर्थ की बुकिंग के साथ 10 फीसदी किराया बढ़ जाता है. 50 फीसदी बर्थ बुक होने के बाद बाकी सीटें सामान्य किराए से डेढ़ गुना ज्यादा कीमत पर बुक होती हैं.

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इसके साथ ही उन्होंने बताया कि एक अन्य विकल्प योजना को संशोधित करने पर भी विचार किया जा रहा है, जो फॉर्मूला हमसफर ट्रेनों में इस्तेमाल किया जाता है. इसमें 50 प्रतिशत सीट वास्तविक मूल्य से 15 प्रतिशत से अधिक पर बेची जाती है. इसके बाद हर 10 प्रतिशत पर दामों में बदलाव हो जाता है.

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