आरबीआई से सरकार ने मांगे पैसे खर्च काबू से बाहर, राजकोष की हालत खऱाब

प्रधानमंत्री मोदी लगातार मिनीमम गवर्नमेंट मैक्सिमम गवर्नेंस की बात करते रहे हैं लेकिन अब सरकार के खर्च इतने बढ गए हैं कि घाटा तक पूरा नहीं हो रहा. टैक्स कलेक्शन की हालत खऱाब है और खर्च में कटौती हो नहीं रही. हालत ये हैं कि सरकार बार बार रिजर्व बैंक की तरफ देख रही है. सरकार ने एकबार फिर से रिजर्व बैंक की तरफ मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है, यह जानकारी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने दी है.


रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष (2019-20) के लिए केंद्र को 1.76 लाख करोड़ रुपये जारी किया था. इस वित्त वर्ष में अब तक 1,23,414 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं जो अब तक एक साल में किए गए ट्रांसफर में सबसे ज्यादा है. इसके अलावा रिजर्व बैंक ने एकबार में 52,637 करोड़ रुपये अलग से ट्रांसफर किए थे जिसको लेकर काफी विवाद हुआ था.

वित्त वर्ष 2019-20 के लिए सरकार ने रेवेन्यू का लक्ष्य 19.6 लाख करोड़ रुपये रखा है, लेकिन आर्थिक सुस्ती के कारण कमाई उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही है. कॉर्पोरेट टैक्स रेट में कटौती के कारण हर साल खजाने पर 1.5 लाख करोड़ का बोझ बढ़ा है. इसके अलावा जीएसटी से भी हर महीने उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो पा रही है.

मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से खबर है कि सरकार रिजर्व बैंक से कहेगी कि साल 2019-20 को अपवाद के रूप में माना जाए और लाभांश का हिस्सा जारी करे. सरकार 35000-45000 करोड़ रुपये रिजर्व बैंक से मदद मांग सकती है. इस साल ग्रोथ रेट घटकर 5 फीसदी पर पहुंच चुका है. हालांकि नवंबर महीने में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी आई है. हालांकि आने वाले दिनों में यह 2 फीसदी की दर से विकास करेगा जो पिछले साल करीब 6 फीसदी की दर से विकास कर रही थी. ऐसे में सरकार की कमाई पर जरूर असर होगा. लेकिन आप सोचिए ऐसे रोज रोज सरकार रिजर्व बैंक से पैसे लेगी तो उसका असर भी अर्थव्यवस्था पर क्या अच्छा होगा.

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