मोदी के मंत्री ने दिया था चैनलों को मौत का झूठा आंकड़ा

भारत की बालाकोट मे एयर स्ट्राइक में 300 लोगों के मारे जाने की खबर मीडिया में सरकार ने प्लांट कराई थी. अलग-अलग मीडिया हाऊस के सूत्रों के मुताबिक केन्द्र का एक मंत्री लगातार अपने चहेते पत्रकारों को मरने वालों की संख्या के बारे में जानकारी दे रहा था.

भारतीय मीडिया की स्थिति मरता क्या न करता वाली बना दी गई थी. न तो उनके पास पाकिस्तान के उस हिस्से में कोई संवाददाता था न बालाकोट से खबर लेने का कोई और ज़रिया रायटर्स, बीबीसी, अल जज़ीरा जैसे चैनल भी बाद में वहां पहुंचे जब पाकिस्तान की आर्मी उन्हें वहां लेकर गई. हालाकि बीबीसी के रिपोर्टरों ने खबर पहले ही दे दी थी.

आम तौर पर अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के भरोसे रहने वाले भारतीय मीडिया के सामने इस बार सिर्फ सूचना का एक विकल्प था वो था ये मंत्री. अफसोस की बात ये है कि इस मंत्री की खबरें उन चैनलों पर भी चलीं जिनके पास कोई स्रोत नहीं था. दरअसल चैनलों ने पिछड़ जाने के डर से दूसरे चैनलों की खबरें उठाकर चलाना शुरू कर दी. ये खबरें पहले से झूठी थी और चोरी की खबरों को और अधिकृत दिखाने के लिए इन चैनलों ने उस संख्या में अपनी तरफ से दस बीस जोड़ दिए.

हालात ये बन गए कि जो खबरें पहले ही झूठी और प्लांटेड थीं उनमें भी मिलावट हो गई. हालात ये हो गए कि जो 250 का आंकड़ा दिया जा रहा था वो भी चोरी होते होते 400 तक पहुंच गया.

पत्रकारों के अड्डे विजय चौक पर होने वाली चर्चाओं में इस मंत्री का नाम आम है. हालात ये है कि ये खबर विपक्षी पार्टियों तक पहुंच चुकी है. खुद डेरेक ओ ब्रायन ने इंडिया टुडे टीवी पर सीधे मंत्री को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया.

आपको पता होगा कि पाकिस्तान में मरने वालों की संख्या को लेकर बड़ा विवाद छिड़ा है. न तो सरकार ने अभी तक मरने वालों की संख्या बताई है न सेना ने.चैनलों में चलाई गई इसी संख्या को सही मानकर मोदी समर्थक सर्जीकल स्ट्राइक से पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात कर रहे हैं. खुद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने मरने वालों की संख्या 250 बता दी है. उधर एयरफोर्स का कहना है कि उसे संख्या नहीं बता क्योंकि ये काम उसका नहीं है.

इस पूरी बहस के बीच मौके पर गई अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने वहां मौतों के या रिहाइश होने के सबूत न मिलने की बात कही है. इससे सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है. चुनाव का समय है इसलिए सरकार इस संख्या को संशोधित भी नहीं करना चाहती और अधिकृत बयान भी नहीं देना चाहती.

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