भारत में मंदी का खतरा, आरबीआई ने खोली मोदी की पोल ?

जब देश में आम चुनाव हो रहा है तो देश की माली हालत काफी खस्ता है और आर्थिक प्रगति रुकी हुई है. बल्कि मंदी के हालात हैं. एक तरफ आरबीआई ने देश की जीडीपी में बढ़त के आंकड़ों को कम कर दिया है तो दूसरी तरफ मंदी की मारी मारुति ने अपनी कारों के उत्पादन में 21 फीसदी की कटौती कर दी है. इसका साफ मतलब है कि आर्थिक नीतियां देश को मंदी की तरफ धकेल रही हैं.

हालात ये हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को 7.4 फीसदी से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया है. रिजर्व बैंक ने कहा है कि सार्वजनिक और निजी उपभोग में कमी की वजह से 2018-19 में लगातार तीन तिमाहियों में आर्थ‍िक गतिविधियों में नरमी आई है.

ब्याज़ में कमी से कोशिश

इतना ही नहीं अपनी मौद्रिक नीति में में महंगाई का डर होने के बावजूत बदलाव किया और रेपो रेट में चौथाई फीसदी की कटौती की. इसका मकसद लोन को सस्ता बनाना है ताकि उद्योग को आसानी से पैसा मिल सके. इससे शेयर बाज़ार में भी तेजी आती है क्योंकि पैसा उपलब्ध होने के कारण लोग शेयर खरीदते हैं. इस नीति से हाऊसिंग लोन सस्ता होगा लेकिन पैसे की उपलब्धता बढ़ने के कारण महंगाई बढ़ेगी और डॉलर भी महंगा हो जाएगा. 

दिसंबर की नीतिगत समीक्षा में आरबीआई ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए ग्रोथ रेट 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. रिजर्व बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2020 की पहली छमाही में जीडीपी में बढ़त दर 6.8 से 7.1 फीसदी रह सकती है और दूसरी छमाही में यह बढ़कर 7.3 से 7.4 फीसदी रह सकती है.

महंगाई बढ़ने की ओर

यही वजह है कि रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई दर के अनुमान में भी संसोधन कर दिय है. वर्ष 2019 की चौथी तिमाही में महंगाई दर 2.4 फीसदी, वित्त वर्ष 2020 की पहली छमाही में महंगाई दर 2.9 से 3 फीसदी और वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही में महंगाई दर 3.5 से 3.8 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है.

हाल में एशि‍याई विकास बैंक (ADB) ने भी भारत के भी ग्रोथ अनुमान को घटाते हुए कहा है कि वित्त वर्ष 2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.2 फीसदी रहेगी. एडीबी ने पहले वित्त वर्ष 2019-20 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.6 फीसदी की बढ़त होने का अनुमान जारी किया था.

एशियाई विकास बैंक ने कहा कि वैश्विक मांग में कमी और घरेलू मोर्चे पर राजस्व में कमी आने की वजह से भारत में भी ग्रोथ कम होगा और 2019-20 में जीडीपी बढ़त 7.2 फीसदी रह सकती है. इसके पहले एडीबी ने वित्त वर्ष 2020 में भारत के जीडीपी में 7.6 फीसदी की बढ़त होने होने का अनुमान जारी किया था. कृषि पैदावार और खपत में कमी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और सरकारी खर्च कम होने से वित्त वर्ष 2017 के 7.2 फीसदी की तुलना में वित्त वर्ष 2018 में ग्रोथ रेट 7 फीसदी ही रह गया था.

मंदी का संकेत

उधर देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने मांग कम होने के चलते मार्च में अपने संयंत्रों में वाहन उत्पादन में करीब 21 प्रतिशत की कटौती की है. शेयर बाजारों को दी जानकारी में कंपनी ने बताया कि मार्च में कंपनी ने कुल 1,36,201 वाहनों का उत्पादन किया. इसमें कंपनी के हल्के वाणिज्यिक वाहन सुपर कैरी की संख्याएं भी शामिल है.

यह पिछले साल इसी अवधि में उत्पादित 1,72,195 वाहनों के मुकाबले 20.9 प्रतिशत कम है. यात्री वाहन श्रेणी में इस दौरान कंपनी का उत्पादन 1,35,236 वाहन रहा जो मार्च 2018 के 1,70,328 वाहनों के मुकाबले 20.6 प्रतिशत कम है.  इस अवधि में कंपनी का वैन उत्पादन छह प्रतिशत बढ़कर 15,710 वाहन रहा जो पिछले साल इसी माह में 14,822 वाहन था. हालांकि कंपनी ने उत्पादन में इस कटौती पर कोई टिप्पणी नहीं दी है.

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