क्या बुजुर्गों को मरने देना चाहिए ? क्या delhi high court के फैसले में फासीवाद का अक्स ?

आप यहां से सामान खरीदकर हमारी आर्थिक मदद कर सकते हैं. आपको सामान उसी दाम में मिलेगा. लेकिन हमें एक हिस्सा मिल जाएगा… www.amazon.in/shop/influencer-1c25a18a Emphasising that the country needs to invest in the future, the Delhi High Court Tuesday said that the Centre’s policy did not prioritise youth in the #Covidvaccination drive. It said that younger patients may also have to be prioritised in distribution of the drug to treat #mucormycosis or black fungus. The division bench of Justices Vipin Sanghi and Jasmeet Singh directed the Government to come out with a policy on the distribution of the drug, Liposomal Amphotericin-B, for treatment of black fungus. “The administration of the drug to patients who have better chances of survival may have to be prioritised. Similarly, patients who are younger and who hold promise for our nation in the future, may have to be prioritised in comparison with the older generation which has lived its life and on whom others will not be as dependent,” it said. Article 21 उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार की टीकाकरण नीति पर सवाल उठाते हुए कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि टीकाकरण में हम अपने युवाओं को दरकिनार कर रहे हैं और बुजुर्गों को तरजीह दे रहे हैं, जबकि देखने में आ रहा है कि संक्रमण की वजह से युवा अपनी जान गवां रहे हैं। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान वैक्सीन की कमी पर गंभीरता जताते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण के खिलाफ जंग में केंद्र सरकार की मौजूदा टीकाकरण नीति संतोषजनक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने शुरुआत में 45-60 साल के लोगों और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण शुरू किया और अब इसे 18 साल के युवाओं के लिए भी शुरू कर दिया, लेकिन उनका टीकाकरण नहीं हो पा रहा। अदालत ने केंद्र सरकार को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण में युवाओं को प्राथमिकता देने का सुझाव देते हुए कहा कि युवाओं को बचाने की जरूरत है, क्योंकि वे देश के भविष्य हैं। 80 साल के बुजुर्गो ने अपना जीवन जी लिया है, यदि संसाधनों की कमी है तो युवाओं के बारे में सोचना चाहिए। हिटलर ने युवाओं अल्पसंख्यकों को महामारी फैलने के लिए दोषी ठहराया था यहं भी 14 जुलाई 1933 को हिटलर एक कानून लेकर आया. इस कानून में वंशानुगत बीमारियो से पीड़ितो लोगों की नसबंदी करने का प्रावधान था 1939 आते आते ये कानून भयावह रूप मे आ गया . गुप्त रूप से एक कानून को इजाजत दे दी. इसका कोड नाम था ऑपरेशन टी -4 1940 1941 के बीच करीब 70 हजार ऑस्ट्रियन और जर्मन विकलांग लोग कार्यक्रम के तहत मार दिए गए इसमें ज्यादातर हत्याएं ज़रीली गैस से की गईं बाद में अगस्त 1941 में हिटवर ने इस कार्यक्रम को हाल्ट पर डाल दिया. लेकिन ये सिलसिला युद्ध के अंततक चलता रहा . अनुमान है कि करीब दो लाख पचहत्तर लाख विकलांग इस कत्लेआम का शिकार हुए. Phillip Bouhler diseases considered hereditary, such as mental illness, learning disabilities, physical deformity, epilepsy, blindness, deafness, and severe alcoholism. With the law’s passage the Third Reich also stepped up its propaganda against people with disabilities, regularly labeling them “life unworthy of life” or “useless eaters” and highlighting their burden upon society. About Girijesh Vashistha of Knocking News (नॉकिंग न्यूज़): Girijesh Vashistha is a senior journalist; he has worked with India Today group, Zee Network, Dainik Bhaskar, Dainik Jagran and sahara samay like Prominent News organizations for 34 years at Editor Level गिरिजेश वशिष्ठ वरिष्ठ पत्रकार हैं. वो इन्डिया टुडे ग्रुप, दिल्ली आजतक, ज़ी, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, सहारा समय समेत अनेक महत्वपूर्ण समाचार संस्थानों में संपादक के स्तर पर जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और पिछले 34 साल से लगातार सक्रिय हैं. यहां आपको मिलेगा Girijesh Vashistha Video from नॉकिंग न्यूज़ (Knocking News) For more videos, subscribe to our channel: https://www.youtube.com/c/KNOCKINGNEWS Check out the KnockingNews website for more news: https://www.KnockingNews.com/ To stay updated, Follow KnockingNews here: Facebook: https://www.facebook.com/KnockingNews/ Twitter: https://twitter.com/KnockingNews Instagram: https://www.instagram.com/KnockingNews/… Telegram: https://t.me/KNLive