सरकारी चैनल विज्ञान प्रसार में ये क्या हो रहा है ? क्या बड़े बवाल की तैयारी है

सरकारी चैनल इंडिया साइंस और इससे जुड़े विवाद खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं. एक विवाद खत्म नहीं होता, दूसरा शुरू हो जाता है. खबर है कि साइंस मिनिस्ट्री और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव ने इन अनियमितताओं की जांच शुरु कर दी है. चुनाव के चलते शायद इसके मंत्री इसको लेकर कोई आदेश नहीं दे सकते इसीलिए विज्ञान प्रसार और इंडिया साइंस अपनी मनमानी करने पर तुला है.

इंटरव्यू और भर्ती के जरिए अपने करीबी लोगों को चैनल में लेने की कवायद लगभग पूरी हो चुकी है और इंटरव्यू अपने आखिरी चरण में है. अभी भी 10 अप्रैल को इंटरव्यू में उन्हीं लोगों को बुलाया गया है जिनकी लिस्ट मीडिया में आ चुकी है. knockingnews को जो लिस्ट मिली है उसके मुताबिक प्रोजेक्ट मैनेजर हिंदी और इंग्लिश के लिए क्रमशः स्नेहलता गुप्ता और शालिनी वर्मा का नाम तय हैं और आप लिस्ट में देख सकते हैं इनके नाम सबसे उपर हैं. हालांकि इस लिस्ट की आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. लेकिन ईमेल में कर्मचारियों का दावा है कि ये लिस्ट सही है.

कर्मचारियों का कहना है कि इस चयन प्रक्रिया में तो गड़बड़ी है ही,इंडिया साइंस चैनल में फिलहाल काम कर रहे मीडियाकर्मियों को प्रताड़ित भी किया जा रहा है. परेशान मीडियाकर्मी के मुताबिक कि इस चैनल के कंसल्टेट यहां काम करने वाले इम्पलाइज़ को रोज मानसिक प्रताड़ना दे रहे हैं. जो उनकी गुड लिस्ट में हैं (बस दो महिलाएं हैं) उनपर उनकी गाज कभी नहीं गिरती, बाकी सबको वे ताक पर रखते हैं. इस चैनल से बिना किसी नोटिस, बिना कंपन्शेसन लोगों को निकाल दिया जाता है. एक दो नहीं बल्कि सात लोग निकाले जा चुके हैं. कर्मचारियों का कहना है कि कर्मचारियों को निकालने के लिए बाकायदा एक नियम बनाया गया. इस मन गढ़ंत नियम में इस नियम के तहत सात लोगों के स्टाफ को दो शिफ्टों में काम करने का आदेश मिला था क्योंकि बताया जाता है कि निदेशक की नज़दीकी एक खास महिला कर्मी को पारिवारिक कारणों से सुबह की शिफ्ट करनी थी. उस शिफ्ट के चक्कर में ने पूरा स्टाफ ही बदल दिया गया.

कर्मचारियों का आरोप है कि हालांकि इस चैनल में जब लोगों ने ज्वाइन किया था तो उनको बताया गया था कि 10 से 6 की शिफ्ट में काम करना है पर कंसल्टेंट महोदय अपनी मनमानी पर उतर आये और इसका खामियाजा लोगों को अपनी जॉब खोकर चुकाना पड़ा. जिसने भी इन दो महिलाओं का विरोध किया या फिर शिफ्ट को लेकर असहज हुआ उसकी नौकरी उस दिन चली गयी. बिना नोटिस के. यह प्रताड़ना अब भी जारी है. बताया जाता है कि सौरव सेन न सिर्फ आफिशियली लोगों पर अपना सनक दिखाते हैं. उनके व्यक्तिगत जीवन पर भी अपना काबू बनाने का प्रयास कर रहे हैं.

अभी हाल-फिलहाल यहां से एक एडीटर को बिना नोटिस निकाला गया है. कर्मचारियों ने नॉकिंग न्यूज़ को एक लिस्ट भी भेजी है. इस लिस्ट में अबततक निकाले गए कर्मचारियों का ब्यौरा है. आरोप है कि नौकरियों को खिलवाड़ बनाने वाले कंसल्टेंट को सिर्फ दो महीने के लिए अपॉइंट किया गया था, लेकिन अपने जुगाड़ के दम पर उसने एक साल का एक्सटेंशन ले लिया. अब आलम यह है कि वो एक साल भी बीत गया और वे इस पद पर टिके हुए हैं.

हालांकि अगर ज्ञान की बात की जाये तो इन साहब को चैनल चलाने का जीरो अनुभव है जिसका चलते कई बड़ी गड़बड़ियां चैनल को झेलनी पड़ीं. सबसे बड़ी गड़बड़ी तो कंसलटेंट महोदय ने चैनल लांचिंग के दिन किया. साइंस और टेक्नोलॉजी मिनिस्टर के हाथों चैनल तो लांच पर ही लाइव नहीं कटा.

इस गड़बड़ी में व्यक्तिगत रूप से कंसलटेंट ही दोषी थे. फिर भी इतनी बड़ी गलती करने के बावजूद वह बदस्तूर चैनल में काम कर रहे हैं और मनमानी भी. इनको हर महीने 2 लाख मिलते हैं जबकि इनको यह भी नहीं पता कि चैनल में बैकग्राउंड स्क्रीन क्या होता है. इनको बस इंग्लिश आती है और इनको लगता है इसी के सहारे पूरा चैनल चल जायेगा. इस चैनल में कंटेंट पर नहीं इंग्लिश उच्चारण पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है. खुद को वेब चैनल का एक्सपर्ट बताने वाले साहब की ज्वाइनिंग के साथ ही इस वेबसाइट की अलेक्सा रैंकिंग बुरी तरह धडाम हुई है. इससे ही समझा जा सकता है कि उनकी पकड़ कहां तक है.

ईमेल देखकर लगता है कि कर्मचारी भरे बैठे हैं. उनका कहना है कि कंसलटेंट महोदय जानबूझकर चैनल को डुबाने में लगे हैं. अगर इस चैनल के प्रोग्राम देखे जाएं तो सिवाय डिबेट शो के यहां कुछ नहीं होता. जो कुछ अलग होता भी है वह यहां नहीं बनता. डिबेट शो में रोज हजारों खर्च होते हैं क्योंकि चैनल में तीन तीन एंकर होने का बावजूद पैसे देकर बाहर से एंकर बुलाए जाते हैं. और गेस्ट तो आते ही हैं. कर्मचारियों ने इस मामले की शिकायत साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, साइंस एंड टेक्नोलॉजी चीफ विजिलेंस आफिसर डॉ. आशुतोष शर्मा, और विज्ञान प्रसार डायरेक्टर नकुल पराशर से भी की है. बताया जाता है कि विभागीय जांच की खबर के बाद इंडिया साइंस चैनल में हड़कंप मचा है लीक हुई लिस्ट पर लीपापोती हो रही है.

(ये खबर मीडिया पूर्व मीडियाकर्मियों के ईमेल पर आधारित है. सलाहकार का कोई पक्ष नहीं लिया जा सका है. यही वजह है कि उनका नाम हम यहां प्रकाशित नहीं कर रहे)