आखिरी वक्त में टल सकते हैं दिल्ली के चुनाव, जानिए अदालत में क्या है

दिल्ली चुनाव के लिहाज से वोटिंग से एक दिन पहले की तारीख 10 बेहद अहम है. इस दिन अदालत में दो अहम मामलों की सुनवाई है जो दिल्ली के चुनाव की शक्ल बदल सकती है. दोनों ही मामले बेहद अहम हैं. ये छोटा संयोग नहीं है कि दोनों मामलों की तारीफ मतदान के ठीक एक दिन पहले पड़ रही है.

पहला मामला

पहला मामला शाहीन बाग के धरना प्रदर्शन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट दायर याचिका पर सुनवाई का है. इस मामले पर सात फरवरी को सुनवाई हो रही है. अमित साहनी की तरफ से दायर एक याचिका में शाहीन बाग के बंद पड़े रास्‍ते को खुलवाने की मांग की गई है. इसके अलावा याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मसले में हिंसा को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज या हाईकोर्ट के किसी मौजूदा जज द्वारा निगरानी की जाए.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच इस पर सुनवाई करेगी. दरअसल, नागरिक संशोधन कानून के विरोध में शाहीन बाग में हजारों लोग दिसंबर 2019 से सड़क संख्‍या 13 ए (मथुरा रोड से कालिंदी कुंज) पर बैठे हुए हैं. यह मुख्‍य सड़क दिल्‍ली को नोएडा, फरीदाबाद से जोड़ती है और रोजाना लाखों लोग आवाजाही में इस सड़क का इस्‍तेमाल करते हैं.

बता दें कि साहनी की तरफ से दिल्‍ली हाईकोर्ट में बीते 13 जनवरी को जनहित याचिका दायर करते हुए मांग की गई था शाहीन बाग में सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारियों को हटाया जाए, क्‍योंकि इससे आम लोगों को बहुत दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है. इससे न केवल लोग कई कई घंटों तक जाम में फंसे रहते हैं, बल्कि ईंधन की बर्बादी और प्रदूषण भी लगातार बढ़ रहा है.

उनकी इस याचिका पर हाईकोर्ट ने दिल्‍ली पुलिस को निर्देश दिया था वह व्‍यापक जनहित को ध्‍यान में रखते हुए और कानून व्‍यवस्‍था को भी कायम रखते हुए उपर्युक्‍त कार्यवाही करे. हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि कानून व्‍यवस्‍था कायम करना पुलिस का क्षेत्राधिकार है और कानून व्‍यवस्‍था कायम रखते हुए वह इस संबंध में कदम उठाए.

इसके बाद दिल्‍ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से सड़क से हटने की अपील की थी, लेकिन वह नहीं माने और लगातार डटे हुए हैं. इसके बाद वकील अमित साहनी ने शीर्ष अदालत का रुख करते हुए एक स्‍पेशल लीव पिटीशन दायर की थी. इस याचिका में मुख्‍य रूप से कहा गया है कि किसी भी नागरिक का प्रदर्शन करना उसका मौलिक अधिकार है और लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था में इसकी मनाही नहीं की जा सकती, लेकिन प्रदर्शनकारियों को यह अधिकार बिल्‍कुल नहीं है कि वो अपने मन मुताबिक जगह पर प्रदर्शन करें, जिससे लाखों लोगों का जनजीवन प्रभावित हो.

दूसरा मामला

दूसरा मामला सीधे केजरीवाल की सीट से जुड़ा है. इस मामले में चुनाव आयोग ने अदालत के नोटिस का संतोषजनक उत्तर नही दिया तो हो सकता है सीएम केजरीवाल की सीटपर चुनाव टल जाए. . कोर्ट 6 फरवरी 2020 को मामले की सुनवाई करेगा.

ग्यारह प्रत्याशियों के नामांकन (Nomination) न भरने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. नई दिल्ली विधानसभा सीट से नामांकन भरने की इच्छा रखने वाले 11 प्रत्याशियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया था कि केजरीवाल (Arvind kejriwal) के नामांकन के चलते उनका नामांकन खारिज कर दिया गया.

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र, चुनाव आयोग और दिल्ली सरकार से नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से नामांकन पत्र दाखिल करने के इच्छुक 11 लोगों की याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है.