अब भारत में भी पांच मिनट में होगा करोना का टेस्ट, ये कंपनी कर रही है शुरुआत

दुनिया की जानी-मानी फ़ार्मा और हेल्थकेयर कंपनी ऐबॉट भारत में वो टेस्टिंग किट ला सकती है जिससे पांच मिनट में कोरोना वायरस के संक्रमण का पता चल जाता है.

यह रिपोर्ट अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी है. अमरीका का फ़ूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) पहले ही इस टेस्टिंग किट को मंज़ूरी दे चुका है. ये टेस्टिंग किट पोर्टेबल है यानी इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है. फ़िलहाल यह किट अभी सिर्फ़ अमरीका में उपलब्ध है.

हालांकि इंडियन एक्सप्रेस से हुई बातचीत में एबॉट के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी 24 घंटे काम करके ज़्यादा से ज़्यादा किट बनाने की कोशिश कर रही है ताकि इसे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जा सके.

अमरीकी अस्पतालों में अगले हफ़्ते से इस किट के ज़रिए कोरोना संक्रमण के टेस्ट होने शुरू हो जाएंगे. कंपनी ने कहा कि इससे रोज़ 50 हज़ार टेस्ट किए जाने की उम्मीद है.

केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ाई की ज़िम्मेदारी अब डीएम (डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट) और एसपी (सीनियर सपुरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस) को सौंप दी है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार केंद्र ने डिज़ास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत डीएम और एसपी को ये ज़िम्मेदारी सौंपी गई है.

केंद्र सरकार ने डीएम और एसपी को निर्देश दिया है कि वो अपने ज़िलों और राज्यों की सीमाओं को सख़्ती से सील कर दें और पलायन कर लौट रहे लोगों को स्थानीय लोगों के संपर्क में न आने दें.

इसके साथ ही केंद्र ने यह निर्देश भी दिया है कि जो मज़दूर शहरों से अपने गांवों में लौटें उनके दूर रहने और खाने-पीने की व्यवस्था की जाए.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि शहरों से गांवों में वापस आए लोगों की पूरी स्क्रीनिंग की जाए और प्रोटोकॉल के तहत अगले 14 दिनों तक सरकारी क्वरंटीन केंद्रों में ही रखा जाए.

केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने कोरोना संकट और लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए लोगों को ईपीएफ़ (कर्मचारी भविष्य निधि) से पैसे निकालने की इजाज़त दे दी है. इसका फ़ायदा छह करोड़ लोगों को मिलेगा.

श्रम मंत्रालय ने अपने एक बयान के अनुसार तीन महीने का मूल वेतन और महंगाई भत्ता या ईपीएफ़ की 75 फ़ीसदी राशि (जो भी कम हो) निकाली जा सकती है.

श्रम मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि इन पैसों को लौटाने की ज़रूरत नहीं होगी. जनसत्ता ने इस ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.