इसके बाद कोरोना पर मीडिया आपको डरा नहीं सकेगा, ऐसे होते हैं ठीक

मैं कोरोना के बारे में कुछ बातें स्पष्ट करना चाहता हूं. ये बातें ज्यादातर लोगों को मालुम हैं लेकिन फिर भी कई लोगों को नहीं पता.  ऐसे लोग वाट्सअप की बकवास के कारण खुद को बेहद खतरे में महसूस कर रहे हैं.

1.     अखबार हैडलाइन बना रहे हैं कि पूरा परिवार करोना का संदिग्ध निकला. करोना के मामले में अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है. सूखी खांसी अक्सर हम सबको एलर्जी के कारण होती रहती है. लेकिन करोना के एक लक्षणों में से ये भी है. जब भी किसी को ऐसे लक्षण होंगे सावधानी के लिए उसे सबसे अलग कर दिया जाता है. ताकि उनकी बीमारी किसी और को न लगे. उनको ही नहीं जिनसे वो हाल में मिले हैं उन्हें भी लोगों से दूर कर दिया जाता है. इसके बाद जांच होती है. 99फीसदी मामलों में करोना नहीं निकलता और ये सभी संदिग्ध मरीज अपने रोजमर्रा के जीवन में व्यस्त हो जाते हैं. लेकिन जब अखबार में आंकड़ा आता है कि 200 संदिग्ध मिले तो सनसनी फैल जाती है. ऐसा ही बुखार के पीड़ितों के साथ हो रहा है और जुकाम वालों के साथ भी.

2.     इस बीमारी के बीमार के संपर्क में आने के बाद वायरस सक्रिय होने में 14 दिन का समय लेता है. अगर आप किसी बीमार या संदिग्ध के संपर्क में आते हैं तो आपको बीमारी हुई है या नहीं ये पता लगने में समय लगता है. इसलिए आपको तबतक निगरानी में रखना होता है. अब ऐसे लोगों को संदिग्ध तो कह सकते हैं लेकिन बीमार नहीं. पर जब अखबार में खबर आती है तो कई लोग समझने लगते हैं कि इतने लोग बीमार हैं.

3.     करोना लाइलाज बीमारी नहीं है. इसका इलाज बेहद आसान है. 99 फीसदी संदिग्धों में से अगर एक आदमी को करोना मिलता भी है तो उसके ठीक होने के भी 99 फीसदी आसार होते हैं. बाकी जुकाम बगैरह जैसे जानलेवा बीमारी नहीं है वैसे ही करोना भी नहीं है. जैसे कभी कभी किसी किसी को जुकाम छाती में फैल जाता है और उम्र ज्यादा होने के कारण जान चली जाती है वैसे ही इस बीमारी में भी होता है. अगर 80 साल से ज्यादा के लोगों को गंभीर कोरोना हो भी जाए तो दस में से 9  लोग ठीक हो जाते हैं. 60 साल से कम के सौ मैं से 95 लोग ठीक हो जाते हैं.

4.     करोना से बचने के लिए कोई बड़ा भारी भरकम काम नहीं करना होता. अपने हाथ हमेशा साफ रखिए. हाथ से मुंह बगैरह न छुए. हाथ साफ रखने के लिए साबुन ही काफी है. ये सेनिटाइजर के मुकाबले 100 गुना असरदार है. सेनिटाइजर से अगर एक भी विषाणु छूट जाता है तो वो हाथ पर ही रह जाता है. लेकिन 5000 साल पुराना अविस्कार साबुन उसे धोकर शरीर से अलग कर देता है. सेनिटाइजर चूंकि जल्दी सूख जाता है. कही भी इस्तेमाल कर सकते हैं इसलिए उसकी एक डिबिया पास रखने में कोई हर्ज भी नहीं है.

5.     जो लोग पानी पूरा पीते हैं उन्हें वायरस वैसे भी ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाता. दिन में दो ढाई लीटर पानी कम से कम पिएं.

6.     वायरस एक बार आ गया तो बिना दवा के जाएगा नहीं ऐसा नहीं होता. हर वायरस का अपना जीवन होता है. किसी का दो दिन. किसी का चार दिन तो किसी का दस दिन. इसके बाद वायरस शरीर से अपने आप खत्म हो जाता है. उसकी कोई दवा भी नहीं होती. शरीर को सपोर्ट देना होता है. और पानी पीना सबसे बड़ा सपोर्ट है. 

7.     आप सोचेंगे कि अगर इतनी मामूली बीमारी है तो हम परेशान क्यों हैं. परेशानी की वजह दूसरी है. ये हैं बीमारी का एक आदमी से दूसरे आदमी में आसानी से लग जाती है. सरल शब्दों में समझें तो ये बीमारी एक फीसदी लोगों की जान लेती है लेकिन इसकी चपेट में ज्यादा लोग आ रहे हैं यही वजह है कि दुनिया की सरकारें चिंतित हैं.

8.     अगर आपको जुकाम है तो आप नहीं चाहते कि वो किसी को लगे. थोड़ा दूर खड़े होते हैं. लोगों से हाथ नहीं मिलाते . अगर आपको करोना जैसे लक्षण हैं यानी जुकाम जैसे लक्षण हैं तो एक मॉस्क पहन लें ताकि खांसने छींकने से जो छोटे छोटे पानी के कण हवा में जाते हैं वो न जाएं. अक्सर करोना का वायरस इन्हीं कणों में छिपा होता है. दूसरे के संपर्क में आने से उसकी सांस के साथ अंदर चला जाता है.

9.     सबसे जरूरी बात ये कि आपको सूचनाएं सिर्फ सही और आधिकारिक स्रोत से ही लेनी हैं. आधिकारिक स्रोत है सरकार. जो सरकार कहे वो सही है. जो डॉक्टर कहे वो सही है. सरकार की तरफ से समय समय पर सावधानियां आ रही है. उनका पालन करते रहना है. वाट्सएप यूनिवर्सिटी की बकवास को ज्ञान न मानें.

(पत्रकार गिरिजेश वशिष्ठ का लेख, वे कोरोना वायरस पर जन जागृति के लिए काम कर रहे हैं)

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