मोदी को कोरोना फंड जुटाने के लिए मनमोहन ने बताए बेहतर रास्ते, कहा सैनिकों के पैसे मत काटो

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकारी कर्मचारियों और सैनिकों के भत्ते काटने को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि नहीं करने के सरकार के कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि इस वक्त केंद्रीय कर्मियों एवं सैनिकों के लिए मुश्किल पैदा करना उचित नहीं है.

कांग्रेस की ओर से जारी पार्टी के सलाहकार समूह की बैठक के वीडियो के मुताबिक सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस को इस वक्त इन सरकारी कर्मचारियों और सैनिकों के साथ खड़े रहना है. सिंह हाल ही में गठित कांग्रेस सलाहकार समूह के अध्यक्ष हैं.

बैठक में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ तो सेंट्रेल विस्टा परियोजना पर पैसे खर्च हो रहे हैं और दूसरी तरफ मध्य वर्ग से पैसे लिए जा रहे हैं. ऐसा नहीं है कि यह पैसा गरीबों को दिया जा रहा है. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी कहा कि सरकार को कर्मचारियों को भत्ते कम करने के बजाय सरकार को सेंट्रल विस्टा परियोजना और दूसरे गैरजरूरी खर्च रोकने चाहिए.

कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार को सैनिकों और कर्मचारियों के भत्ते काटने के बजाय ‘सेंट्रल विस्टा’, बुलेट ट्रेन परियोजनाओं और फिजूल खर्च पर रोक लगानी चाहिए. पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार का निर्णय संवेदनहीन और अमानवीय है. उन्होंने ट्वीट किया कि लाखों करोड़ रुपये की लागत वाली बुलेट ट्रेन परियोजना और सेंट्रल विस्टा सौंदर्यीकरण परियोजना को निलंबित करने के बजाय कोरोना वायरस महामारी से जूझ कर जनता की सेवा कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशन भोगियों और देश के जवानों का महंगाई भत्ता काटना सरकार का संवेदनहीन तथा अमानवीय निर्णय है.

उन्होंने वीडियो लिंक के माध्यम से कहा, ‘‘कोरोना वायरस महामारी के संकट से पैदा हुई आर्थिक मंदी और आय की तंगी पर मरहम लगाने के बजाय मोदी सरकार जले पर नमक छिड़कने में लगी है.” सुरजेवाला ने सवाल किया, ‘‘ उसने हाल ही में 30,42,000 करोड़ रुपये का बजट पारित किया. बजट में आय व खर्चे का लेखा-जोखा स्पष्ट तौर से दिया जाता है. फिर बजट पेश करने के 30 दिन के अंदर ही मोदी सरकार सेना के जवानों, सरकारी कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते पर कैंची चलाकर क्या साबित कर रही है?”

उन्होंने दावा किया कि महंगाई भत्ते में ‘अन्यायपूर्ण कटौती’ से लगभग 1.13 लाख सैनिकों, कर्मचारियों और पेंशनरों की तनख्वाह से सालाना 37,530 करोड़ रुपये की कटौती होगी. सुरजेवाला ने कहा, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि मोदी सरकार द्वारा महंगाई भत्ते की कटौती कर जख्म देने की इस कवायद ने देश की रक्षा करने वाले तीनों सेनाओं के हमारे सैनिकों तक को नहीं बख्शा.

इस कटौती के जरिये सेनाओं के 15 लाख सैनिकों और लगभग 26 लाख सैन्य पेंशनभोगियों के 11,000 करोड़ रुपये काट लिये जाएंगे.” उन्होंने कहा, ‘‘ कोरोनावायरस महामारी के बावजूद सरकार ने आज तक 20,000 करोड़ रुपये की लागत वाली सेंट्रल विस्टा परियोजना खारिज नहीं की. न ही उसने 1,10,000 करोड़ रुपये की लागत वाली बुलेट ट्रेन परियोजना बंद की. उसने फिजूल के सरकारी खर्चों में कटौती की घोषणा भी नहीं की, जिससे 2,50,000 करोड़ रुपये सालाना बच सकते हैं.”