बीजेपी के मंत्री ने प्राधिकरण में प्लांट किए बिल्डरों के आदमी, सीईओ ने हटाया

नोएडा : यूपी का पूरा सिस्टम कैसे बिल्डरों के कब्जे में है इसका अंदाज़ा इस खबर से लगाया जा सकता है.  ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में बिल्डरों ने बाकायदा कुछ मैनेजर बैठा रखे थे जो बाकायदा फाइलों पर नज़र रखते थे और उन्हें आगे बढ़ाते थे. तीनों को सीधे प्रदेश के एक मंत्री के कहने पर बैठा दिया गया था और इस के लिए सीईओ की इजाजत तक नहीं ली गई थी.

सूत्रों के मुताबिक हटाए गे लोगों में से एक भाजपा नेता का बेटा है. करीब नौ माह पहले उसे प्राधिकरण में अस्थायी नौकरी पर रखा गया था, लेकिन केंद्रीय मंत्री के विरोध के कारण उसे हटा दिया गया. इस बात को लेकर केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के मंत्री के बीच ठन गई थी.

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मामला शांत होने के बाद उसे छह माह पहले फिर से प्राधिकरण में तैनात कर दिया गया. बादलपुर गांव के राजेंद्र नागर ने इस मामले की शिकायत की. उसका आरोप था कि दीपक चौधरी, विक्रांत व विपिन को मंत्री के कहने पर गलत तरीके से नौकरी पर रखा गया है.

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बिल्डर के इन लोगों में बाकायदा दो प्रबंधक और एक ड्राफ्टमैन था. तीनों रोज़ प्राधिकरण के दफ्तर में जाते थे. फाइलें निपटाते थे. बिल्डरों के लिए जानकारियां जुटाया करते थे और वेतन प्राधिकरण से नहीं बिल्डरों की संस्था क्रेडाई की तरफ से लेते थे. तीनों कर्मचारी बिल्डरों से संबंधित फाइलों का निस्तारण कर आला अफसरों की मंजूरी के लिए भेजते थे.

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आरोप है कि गोपनीय जानकारी भी प्रबंधकों के जरिए बिल्डरों को आसानी से मिल रही थी. बुधवार को मामला संज्ञान में आने के बाद सीईओ देबाशीष पंडा ने तीनों को हटा दिया. इस मामले में एसीईओ से जवाब तलब किया गया है. बताया जाता है कि तीनों को प्रदेश के एक मंत्री के कहने पर रखा गया.

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