कल कर्नाटक में ये हथकंडे अपना सकते हैं अमित शाह, आपने सोचा भी नहीं होगा ये खेल

नई दिल्ली: कहते हैं कि राजनीति में सबकुछ मुमकिन है. अंग्रेज़ी में मुहावरा है पॉलिटिक्स इज द आर्ट ऑफ पॉसिबल. अगर कर्नाटक में चल रहे खेल देखें तो पता चलेगा कि यहां इस मुहावरे को कई तरह से निभाया जा रहा है.

अब तक कर्नाटक में जो खेल हुए या जो तिकड़में हुईं वो तो सबने देखीं लेकिन कल शाम चार बजे के शक्ति परीक्षण में बीजेपी क्या क्या तरीके अपना सकती है उसकी बानगी यहां देखिए.

  1. विधायकों को अयोग्य घोषित करना

केजी बोपैया जिन्हे गवर्नर ने काम चलाऊ स्पीकर बनाया है वो विधायकों को अयोग्य ठहराकर विश्वास मत पास कराने के लिये कुख्यात हैं. 2011 में वो ही प्रोटेम स्पीकर थे. उस समय उन्होंने 11 विधायको को अयोग्य करार कर के येदियुरप्पा को विश्वास मत जिता दिया था.  मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो उनके फैसले को अदालत ने गलत ठहराया और उन्हे फटकार भी लगाई थी. हो सकता है कि ये तरीका वो फिर से अपनाएं.

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार लिखते हैं कि कल (शनिवार) को बोपैया फिर से यही रणनीति अपनायेंगे इस बात की पूरी आशंका है. सदन के अंदर बीजेपी के विधायक एक योजना के तहत शोर गुल मचा कर कांग्रेस और जेडीएस के विधायको से उलझ सकते है और इस अफरा तफरी में बोपैया वही करेंगे जैसा वो 2011 में कर चुके हैं विपक्ष के दस पंद्रह विधायको को अयोग्य कर के घटी हुई संख्या में विश्वास मत पर वोटिंग करा दे.

  1. विधायकों का पहुंचने से रोकना

विधायक एक रिसॉर्ट में बंद हैं और उन्हें बस में वोट डालने के लिए विधानसभा में आना है. ये भी मुमकिन है कि रास्ते में विधायकों की बस कहीं अज्ञात कारण से पैदा हुए ट्रैफिक जाम में फंस जाए. और सुप्रीम कोर्ट के बताए समय तक विधायक विधानसभा न पहुंच पाएं और स्पीकर उपस्थित लोगों की संख्या के आधार पर वोटिंग करवा दें. इसके लिए रास्ते में जाम लगवाया जा सकता है. एक्सीडेंट हो सकता है और बस पंक्चर भी हो सकती है.

  1. क्रॉस वोटिंग का खेल

अ- पत्रकार मुकेश कुमार के मुताबिक विधायकों के घरवालों को धमकाकर क्रॉसवोटिग के लिए प्रेशर बनाने का एक विकल्प हो सकता है.

आ- मंत्रिमंडल में शामिल होने का लालच तो पुराना है लेकिन सरकार बनने का भरोसा होने की स्थिति में विधायकों को दूसरे विधायकों के साथ डील होने की बात कहकर भरमाया जा सकता है. मोटी रकम लगाकर जीतने वाले विधायक कभी न तो चुनाव चाहते हैं न विपक्ष में बैठना. जब उनहें भरोसा हो जाएगा कि बीजेपी की सरकार बन रही है तो ईमान बेच सकते हैं.

इ- बीमारी के बहाने विधायकों को रोकने का खेल भी हो सकता है. ये मुमकिन है कि कुछ विधायक बीमारी का बहाना करके अस्पताल में भर्ती हो जाएं और वोटिंग में शामिल न हों.

  1. दलबदल कानून का पर एक्शन

दल बदल कानून में सदस्यता रद्द करना या न करना स्पीकर का अधिकार होता है. अगर दलबदल कानून को तोड़कर कुछ विधायक बीजेपी को वोट कर देते हैं तो भी उनके उपर कार्रवाई स्पीकर को करनी होती है. ऐसे में स्पीकर कार्रवाई को लटका सकते हैं. क्योंकि कानून में कार्रवाई की समय सीमा तय नही की गई है.

1 टिप्पणी

  1. Modi & Amit Shah ko esa lagata hey ki ye bono mahan hey.. jitane ki hisyat nahi hey aur sirf lukhkhaagiri karake satta pa le te hey.. Poora Desh aur Duniya aur Janata moorkh nhi hey. Moorkh sirf un bono ko “support” karanewale hey.. khud ka ghar nahi chala saka vo Desh chalane nikala hey aur poori tarah vifal raha.

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