बिना ईवीएम चुनाव होते ही बीजेपी हुई साफ, एक महीने में ही इतना कैसे बदल सकते हैं वोटर ?

लोक सभा चुनाव के एक ही महीने बाद कर्नाटक के स्थानीय निकाय चुनाव हुए. एक महीने  में न तो मोदी सरकार ने शपथ ली थी न मन बदलने का कोई कारण था लेकिन जिन लोगं ने बीजेपी को जमकर वोट दिए थे और रिकॉर्ड तोड़ सीटें दिलाई थीं उन्होंने ही बीजेपी को धूल चटादी. नतीजे वही आए जो किसी दक्षिण के राज्य में आम तौर पर आया करते हैं. अंतर सिर्फ इतना है कि अरोड़ा जी के चुनाव आयोग ने वहां चुनाव नहीं कराए थे और दूसरा वहां वोट पेपर बैलेट से पड़े ईवीएम से नहीं.

कांग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद ने अपने ट्वीट में कहा..

 फिर से सवाल! कर्नाटक में बैलट पेपर से चुनाव हुए और वहां कांग्रेस की शानदार जीत हुई. बता दें कि कर्नाटक में 56 शहरी स्थानीय निकायों में कुल 1,221 वार्डों में से कांग्रेस ने 509 वार्डों में जीत हासिल की जबकि बीजेपी को सिर्फ 366 स्थानों पर जीत मिली. 

रिजल्ट के तुरंत बाद पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी निकाय चुनाव के नतीजे शेयर करते हुए ट्वीट करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से ईवीएम पर सवाल उठाए थे.

सुरजेवाला ने लिखा था, ‘कर्नाटक में 19 और 23 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ था. इसके एक महीने के बाद 29 मई को शहरी स्थानीय निकाय का चुनाव हुआ. लोकसभा चुनाव में केंद्रीय चुनाव आयोग के तहत आने वाली ईवीएम का उपयोग किया. शहरी निकाय के चुनाव में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकार के तहत आने वाली ईवीएम का उपयोग हुआ. हम खुश हैं कि लोगों ने अपनी सोच बदली और कांग्रेस को चुना.’

‘हम हारे हैं लेकिन टूटे नहीं’

उधर, अब सलमान खुर्शीद ने इस जीत के बहाने ईवीएम पर सवाल खड़े किए हैं. इस सवाल के साथ ही खुर्शीद ने फेसबुक पर एक पत्र के जरिए अपनी भावनाएं जाहिर की हैं, जिसमें उन्होंने यह बताने की भी कोशिश की है कि कांग्रेसी हारे हैं लेकिन टूटे नहीं हैं.

‘विचारों की प्रतियोगिता हार से बहुत दूर है…’

इस फेसबुक पोस्ट के जरिए भी खुर्शीद ने ईवीएम पर सवाल उठाए हैं और इशारा किया कि इसे लेकर मौन शिकायतें हैं. खुर्शीद ने इस दौरान वोटरों से भी अपील की है कि अगर ऐसा है तो वे सड़क पर क्यों नहीं उतर रहे हैं?

 साथ ही कांग्रेसी नेता ने यह भी कहा है कि अगर दुनिया यह मान रही है कि इसमें छेड़छाड़ संभव है तो फिर हम इसे सुन क्यों नहीं रहे हैं? कांग्रेसी नेता ने आगे लिखा, ‘हम भले ही आंकड़ों के इस खेल में हार गए लेकिन जैसा कि अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा है कि विचारों की प्रतियोगिता हार से बहुत दूर है तो हम उसी राह पर चल रहे हैं.’

राजस्थान, MP का खुर्शीद ने दिया उदाहरण

हालांकि इस पोस्ट में खुर्शीद ने आगे लिखा है, ‘शायद बदलते समाज के साथ लोकतंत्र बदल रहा है. हमें बार-बार बताया जाता है कि हम उस बदलाव को पढ़ नहीं पा रहे हैं. हो सकता है ऐसा संभव हो लेकिन तब सवाल यह भी है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात में क्या हुआ…..’ बता दें कि हालिया विधानसभा चुनावों में जहां कांग्रेस ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में बीजेपी को हराया, वहीं गुजरात में भी अच्छी टक्कर दी.