कारगिल विजय के इस कड़वे सच को भी तो जानिए, पत्रकार का कड़वा लेख

कारगिल विजय दिवस . अच्छा नाम है और इस मौके पर दी जा रहीं बधाइयों ने इसमें चार चांद लगा दिए हैं. देश भर से शुभकामनाएं आ रही हैं और लोग सोशल मीडिया पर बधाई के साथ साथ पुरानी तस्वीरें डालडाल कर सबूत भी दे रहे हैं कि वो उस वक्त के साक्षी हैं अफसोस साक्षी होने के सबूत दे रहे हैं अपने साक्षी होने के साक्ष्य भी दे रहे हैं लेकिन साक्षी के नाते आने वाली पीढ़ियों के सामने जो साक्ष्य रखना चाहिए वो नहीं रख रहे.

देश का गौरव विजय में है लेकिन देश की भविष्य की सुरक्षा तो भावी विजय सुरक्षित करने में ही है ना. आज से बीस साल बात जब इतिहास का विद्यार्थी जब रिसर्च कर रहा होगा तो उसे क्या बताएंगे. आपकी बधाइयां उसके लिए काफी होंगी. उसे नहीं बताना चाहेंगे कि इस जीत का मतलब क्या है. इस जीत को कैसे हासिल किया गया ? कैसे रोकेंगे आप गारगिल से हुए नुकसान को दोबारा होने से . कैसे रोकेंगे आप 527 देश के सबसे महत्वपूर्ण नागिरकों का फिर से बलिदान कैसे अंग भंग हो गए 1300 बहादुर सैनिकों को आगे बचाया जा सकता है इसके उपाय कैसे निकालेंगे.

कैसे सैन्य विज्ञान का विद्यार्थी जानेगा कि भविष्य में  पाकिस्तान से 5000 फौजियों को भारत में घुसने से रोकने के लिए कैसे इंतज़ाम किए जाएं. कैसे वो जानेगा कि कारगिल में गद्दार नेताओं की भूमिका भी संदिग्ध थी.

देश को जानना चाहिए कि कारगिल पर कब्जा जमाए बैठे 5000 पाकिस्तानी फौजियों ने कैसे हमारे पांच गश्ती सैनिकों की हत्या की थी. ये भी जानना चाहिए कि ये पांच हज़ार सैनिक कारगिल की ज़मीन पर मारे क्यों नहीं गए. वो कैसे वापस गए. कौन था रक्षा मंत्री जिसने पाकिस्तानी सैनिकों को सेफ पैसेज देने की बात की थी.

देश को पता होना चाहिए कि कारिगल के दौरान मेजर कयानी के साथ फ्लैग मीटिंग में बॉर्डर पर क्या तय हुआ. आप कारगिल में मौजूद थे आप दर्ज तो करिए . इतिहास मे लिखिए तो कि पाकिस्तान का कौन सा प्रधानमंत्री था जिसने कारगिल में 5000 सैनिकों को घुसाया . उस प्रधानमंत्री से मिंलने नृशंस हत्याओं के बाद बस में बैठकर मिलने कौन गया था. उस प्रधानमंत्री को शपथ ग्रहण समारोह में किसने बुलाया था और लिखिए कि किसने उस प्रधानमंत्री के परिवार के शादी ब्याह में शामिल होने के लिए सारे प्रोटोकोल तोड़े थे.

लिखिए कि कारगिल में सैनिक घुसाने वाला आर्मी चीफ कौन था. लिखिए कि आगरा में उसे बुलाकर बिरयानी खिलाने वाले कौन थे. किसने दाल बुखारा से उसको भोग लगाया था.

आप मत भूलिए . देश भी भूले तो अच्छा नहीं लगता लेकिन कारगिल से पाकिस्तानी घुसपैठियों में से कितने हमारे 527 सैनिकों को मारने के बाद सलामत कैसे लौटे. कारगिल के समय भारत के पास कई उपग्रह थे सालभर घुसपैठ चलती रही एक चरवाहे के देखने से पहले हमारे देश की चौकस सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं पूरे 5000 फौजियों. उनकी रसद, उसके ट्रक, उनके उपकरण उनकी तोपें और उनके तंबुओं को क्यों नहीं देख सकी.

इतिहास में लिखिए कि क्यों और किसने भारत की सुरक्षा के लिए अहम बोफोर्स तोपों की खरीद को रोकने कि लिए ज़मीन आसामान एक किया. लिखिए कि हथियार लॉबी में वो कौन लोग थे जो बोफोर्स सौदे के खिलाफ तरह तरह की गुमराह करने वाली सूचनाएं बोफोर्स के प्रतिद्वंदियों के ज़रिए लेकर सक्रिय थे. मत भूलिए कि बोफोर्स तोप कुछ ज्यादा मात्रा में होतीं अगर बाद में बकवास सिद्ध हुए आरोप न लगे होते.

सुरक्षा का मामला है तो ये भी बताना बनता है कि वो कौन लोग थे जिन्होंने पाकिस्तान के तैयार रखे परमाणु बम को आधिकारिक स्टेटस प्रदान करने के लिए भारत में परमाणु परीक्षण किया ताकि दूसरे ही दिन पाकिस्तान परमाणु परीक्षण कर सके और उसपर उंगली भी न उठे. लिखिए कि तब पाकिस्तान का पीएम कौन था और भारत में कौन लोग थे

कारगिल हो या कोई और युद्ध सैनिक युद्ध नहीं करते . युद्ध वो लोग करते हैं जो युद्ध नहीं लड़ते. जान लड़ने वालों की जाती है लड़ाने वाले सुरक्षित रहते हैं. भविष्य का विद्यार्थी जानना चाहेगा कि सैनिकों की जान किसकी लापरवाही से गई. किसकी राजनीति कारगिल के गुनहगारों से प्यार करती रही. आप गवाह थे दर्ज कर दीजिए ताकि भविष्य में कोई दूसरा कारगिल न हो. कोई और सैनिक न मरे. कोई और चूक न हो और युद्ध का राजनीतिक लाभ लेने के लिए कोई फिर से मौत का खेल न खेले. देश में यश गाथा और आरती संग्रह लिखने वाले अपना काम कर रहे हैं. आप भी तो करिए. उन्होंने मेरा भारत महान बेचा, शाइनिंग इंडिया बेचा, उदय भारत बेचा और अब नया भारत बेच रहे हैं. कोई तो हो जो कुछ कड़वा सच लिख जाए ताकि आने वाली पीढ़ी के सैनिक, वैज्ञानिक, इतिहासकार और राजनेता कुछ अच्छा करना चाहें तो उनके पास जानकारियां हों. जय हिंद आजतक के वरिष्ठ पत्रकार का फेसबुक पर लेख