वाट्सएप पर भक्त को मिला करारा जवाब, लग पड़े ठहाके

वाट्सएप ग्रुप में इस मजेदार बहस को जबरदस्त तरीके से वायरल किया जा रहा है. खबर हमदर्द लेबोरेटरी से जुड़ी है. एक मैसेज वाट्सएप पर काफी दिनों से फैलाया जा रहा है कि हमदर्द हिंदुओं के खिलाफ काम करती है और उन्हें ही नौकरी देती है. इसके जवाब में एक नहले पर दहला आया. जवाब देने वाले ने पहले झूठ का जवाब दिया फिर एक और ऐसी झूठी जानकारी जोड़ी कि लोग हंस हंसकर लोट पोट हो गए.

पहले पढ़िए वो पोस्ट जो सोशल मीडिया पर फैल रहे झूठ का हिस्सा है.
मशहूर यूनानी दवा कंपनी #हमदर्द में एक भी हिन्दू युवक को काम नहीं मिलता वो भी सिर्फ इसलिए कि वो हिन्दू है. अल्पसंख्यक मंत्रालय और वक्फ बोर्ड के करोड़ो रूपये की सहायता से चलने वाला “हमदर्द” वक्फ लैबरोटरी जिसके प्रोडक्ट साफी, रूह आफजा, सौलिन, जोशिना आदि है उसके डिस्ट्रीब्यूटर या C&F बनने के लिए पहली शर्त है की आवेदक सिर्फ मुस्लिम होना चाहिए.
इस कंपनी में सेल्समैन से लेकर एमडी तक प्रत्येक काम करने वाला मुस्लिम है. इसी कंपनी की ब्रांच पाकिस्तान में भी है. सरकारी पैसे से चलने वाले दवा की कम्पनी का ये रुल है. जहाँ हिन्दूओ को सेकुलरवाद की घुट्टी पिलाकर नींद में सुला दिया गया है मीडिया यह बात आपको कभी नहीँ बताएगी. अहमदाबाद की एक कंपनी ने एक मुसलमान को रोजागार देने से मना किया तो सारी मीडिया शोर मचाने लगी.
किन्तु – हमदर्द एक ऐसी कंपनी है ,जिसके सारे कर्मचारी मुसलमान हैँ. रुह अफजा,सिंकारा तथा साफ़ी जैसे अनेक उत्पाद हैँ इसके, जिसके मुख्य उपभोक्ता तथा खरीददार हिन्दू ही हैँ. भारत में होने के बावजूद इसमें कोइ हिन्दू कार्य नहीँ कर सकता ! इसके सारे कर्मचारी मुसलमान हैँ!..शुक्रवार को यह कंपनी मस्जिद में परिवर्तित हो जाती है !..इस कंपनी में हिन्दुओं को पैर तक नही रखने टिया जाता ! इस कंपनी के सारे उत्पादों का बहिष्कार करें. यह सत्य अधिक से अधिक लोगों को बताऐं तथा शेयर करें. ? यह फारवर्डेड मैसेज है. जो देश भक्त होगा और देश ?? से प्यार करेगा और सच हिंदुस्तानी होगा वो कसम खाए. ये प्रोडक्ट कभी नही खरीदेगा. जय हिन्द.

मैसेज का जवाब
इसके बाद इस मैसेज का जवाब आया. ये और भी खतरनाक था . क्या बोलूं . मेरी बद दुआ है कि जो भारत जैसे महान देश में आग लगाने के लिए ऐसे झूठ फैला रहे हैं उनके खाकी कच्छे में करोना हो जाए. हमदर्द प्राइवेट कंपनी है. यानी वक्फ के पैसे का कोई लेेना देना नहीं. मालिकों में भी एक हिंदू है. यूनानी दवा बनाती है इसलिए नाम उर्दू टाइप होते हैं. यूनानी क्या होता है ये उम्मीद करता हूं सही पता होगा. न तो ये सरकारी पैसे से चलती है न इसमें कोई धार्मिक प्रतिबंध है. अपने शहर के डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर पता कर लें और इस पोस्ट को भेजने वाले को उसका नाम भेजें. पाकिस्तान में तो डोभाल के बेटे का कारोबार भई है. और पाकिस्तन में जो हमदर्द लेबोरेटरी है वो बंटवारे के पहले से हैं. दोनों के मालिक अलग हैं. भारत में हिंदू मुसलमान का सबसे ज्यादा बवाल है तो एक जगह है. उस कंपनी के पास जो ब्रिटेन की सरका चलाती है और जिसका मेन्डेट और संविधान आजतक गुप्त है क्योंकि ब्रिटेन की सरकार का समझौता था कि इसकी हकीकत किसी के सामने नहीं रखई जाएगी. ये ब्रिटेन की सरकार की संस्था है. 1947 पहले से ये संस्था अंग्रेजी ड्रेस पहनती है और वहां मुसलमान और हिंदुओं के बीच आग लगाने के लिए आज भी हवाला के जरिए अरबों रुपये आते हैं. इस संस्था का एक दफ्तर नई सड़क पर हनुमान चौराहे के पास है. माधव कॉलेज के आसपास कहीं. आप जाकर देख लें इस दफ्तर में मुसलमानों के घुसने पर भी रोक है. ये बात आजतक छिपाकर रखी गई थी. आज बता रहा हूं. आप पूछ लीजिए मालवजी को भी पता होगी. देश के गददारों को गोबर मारो सालों को . जैन साब जिसने आपको ये मैसेज भेजा है उसे जरूर भेजें. मेरा खून खौल रहा है क्योंकि आप जैसे सज्जन आदमी को उसने उल्लू बनाने की कोशिश की लेकिन मेरे जैसे मित्र होने के कारण वो सफल नहीं हुआ.