आरक्षण नहीं इस बात पर है आज का बंद, जानिए कैसे बढ़ी मोदी की मुसीबत

मोदी सरकार का ये फैसला उसके ही गले पड़ गया है.  कई ऊंची जात वाले हिंदू संगठनों ने आज भारत बंद का भी आह्वान किया है. फिलहाल, सरकार ने एहतियात के तौर पर मध्यप्रदेश के जिलों में धारा 144 लागू कर दी है. इसके अलावा पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और भारत बंद के मद्देनजर ग्वालियर के सभी स्कूल और कॉलेज को बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं.

गौरतलब है कि एससी/एसटी एक्ट को लेकर सु्प्रीम कोर्ट ने एक फैसला दिया था. फैसले में कहा गया था कि इस कानून में किसी की गिरफ्तारी  से पहले आरोपों की जांच कर लें सिर्फ शिकायत पर ही गिरफ्तारी ठीक नहीं. इसके बाद दलित नाराज़ हुए और उन्होंने इसके खिलाफ बंद का आयोजन कर दिया. दलितों के वोटों को लेकर चिंतित केन्द्र सरकार ने इस फैसले को उलटने के लिए कानून में संशोधन किया. इसके बाद से धीरे-धीरे सवर्णों में नाराजगी बढ़ने लगी.

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कई संगठनों ने सरकार पर दलितों के तुष्टिकरण का भी आरोप लगाया. बताया जा रहा है कि सवर्णों की नाराजगी अब बाकी राज्यों की ओर भी रुख करने लगी है.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था ये फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एससी/एसटी एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी न किए जाने का आदेश दिया था. इसके अलावा एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दी थी.शीर्ष अदालत ने कहा था कि इस कानून के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी की बजाय पुलिस को 7 दिन के भीतर जांच करनी चाहिए और फिर आगे ऐक्शन लेना चाहिए.

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संसद में SC/ST एक्ट में संशोधन पारित किया

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटते हुए एससी/एसटी एक्ट को वापस मूल स्वरूप में बहाल कर दिया.हाल ही में ये संशोधित एससी/एसटी (एट्रोसिटी एक्ट) फिर से लागू किया है. अब फिर से इस एक्ट के तहत बिना जांच गिरफ्तारी संभव हो गई.

विरोध की वजह

सरकार के संशोधित एससी/एसटी एक्ट का विरोध की बड़ी वजह गिरफ्तारी वाली पहलू माना जा रहा है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि इस गिरफ्तारी वाले प्रावधान की वजह से कई बार इस एक्ट के दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं. इसीलिए ऐसा न हो सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रावधान में संशोधन कर गिरफ्तारी से पहले जांच की बात कही थी.

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भारत बंद का ऐलान

सवर्णों ने इस फैसले के विरोध में 6 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया है. बताया जा रहा है कि सवर्णों के 35 संगठन इस बंद का आह्वान कर रहे हैं. गौरतलब है कि इससे पहले जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था तो दलितों ने 2 अप्रैल को भारत बंद किया था. जिसके बाद कई जगह हिंसा हुई और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया.

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