गंभीर संकट में राजस्थान की गहलोत सरकार,बीजेपी के हाथ में सचिन पायलट, ये है गेम प्लान

राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच लड़ाई अंतिम दौर में पहुंच गई है. राजस्थान में सरकार को अस्थिर करने के मामले में एटीएस (एंटी टेरर स्क्वाएड ) और एसओजी की ओर से सचिन पायलट को नोटिस भेजा गया है.

इसके बाद से सचिन पायलट काफी नाराज हो गए. उनके समर्थकों का कहना है कि यह सिर्फ सचिन पायलट को प्रताड़ित करने के लिए किया जा रहा है क्योंकि राजस्थान में गृह मंत्रालय भी अशोक गहलोत के ही हाथ है और एसओजी उन्हीं के अधीन आता है.

गहलोत ने एसओजी का गठन विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले की जांच के लिए गठित किया है. हालांकि इसमें सीएम अशोक गहलोत भी पूछताछ के लिए शामिल हो सकते हैं. हालांकि इसे बात को सचिन पायलट के समर्थक ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं. वहीं सूत्रों का दावा है कि सचिन पायलट के पास 19 विधायकों का समर्थन है और वह बीजेपी के संपर्क हैं.

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उधर अशोक गहलौत कह रहे हैं कि मुख्य मंत्री और उप मुख्यमंत्री को सामान्य पूछताछ के लिए बुलाया गया है क्योंकि विधायकों की खरीद फरोक्त की बात सामने आई थी. इस बीच सचिन पायलट दिल्ली में हैं और अशोक गहलौत ने सभी विधायकों को जयपुर में रहने को कहा है.

इस बीच, राजस्थान से बीजेपी सांसद ओम माथुर ने कहा है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के साथ ही सत्ताधारी पार्टी में कलह शुरू हो गई थी. सीएम अशोक गहलोत को बीजेपी पर आरोप मढ़ने से पहले अपने घर में झांकना चाहिए. क्या सचिन पायलट पाला पलटेंगे? इस पर ओम माथुर ने कहा कि जिसने (सचिन पायलट) पांच साल मेहनत की उसे मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, जो दिल्ली में थे (अशोक गहलोत) उन्हें सीएम बना दिया गया. उसी दिन से यह साफ हो गया कि मेहनत किसी और ने की और फल कोई और खा रहा है. इनकी (कांग्रेस) अंतर्कलह पहले दिन से ही शुरू हो गई थी.

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ओम माथुर ने के मुताबिक अशोक गहलोत ठीकरा जबरदस्ती बीजेपी पर फोड़ रहे हैं.  बीजेपी के राज्यसभा सांसद ने कहा कि राजस्थान में अभी के सियासी हालात के लिए कांग्रेस को बीजेपी को दोष नहीं देना चाहिए. उन्हें अपना घर देखना चाहिए. जब गहलोत सरकार का गठन हुआ था, तब से यह संकट चला आ रहा है. सचिन पायलट और अशोक गहलोत की लड़ाई इसकी असली वजह है. गहलोत बीजेपी को दोष देने की कोशिश कर रहे हैं.

ओम माथुर ने कहा कि अशोक गहलोत के पास पूर्ण बहुमत है और बसपा को मिलाने के बाद तो उनके पास 107 विधायक हो गए हैं. ऐसे में उनको डरने की क्या जरूरत थी. हर दो साल में राज्यसभा के चुनाव होते हैं.