अगली बार किसी अमिताभ बच्चन जैसे नीम हकीम के चक्कर में मत पड़ना, डॉक्टर ही ठीक है

लेखक गिरिजेश वशिष्ठ वरिष्ठ पत्रकार हैं. टीवी, इंटरनेट और अखबार की पत्रकारिता में वो अपना लोहा मनवा चुके हैं.

अमिताभ बच्चन अस्पताल में हैं उनकी उम्र में कोविड बहुत खतरनाक होता है और उनके दूसरे कई रोगों के साथ ये संक्रमण काफी जोखिम भरा है.इसलिए हम अमिताभ बच्चन के ठीक होने की कामना करेंगे. हम सब संवेदनशील हैं और चाहते हैं कि कोई भी कोरोना जैसी बीमारी का शिकार न हो, लेकिन क्या भारत के सेलेब्रिटी खुद कोरोना या दूसरी बीमारियों नें जिम्मेदारी से और लोगों के जीवन की परवाह करके बयान देते हैं.

आज अमिताभ बच्चन बीमार हैं तो सभी चिंतित हैं. कोरोना की बीमारी अब बड़ी लगने लगी है और सब सोचते हैं कि अमिताभ बच्चन सुरक्षित नहीं हैं, अनुपम खेर सुरक्षित नहीं हैं तो हम कैसे हो सकते हैं लेकिन सोचिए कुछ समय पहले तक ये बड़े लोग देश की जनता को इस जानलेवा दौर में निहित स्वार्थों की खातिर बरगला रहे थे.

अपनी जिंदगी में सफलता के लिए हर समझौता कर चुकी इस वीआईपी कौम ने कभी नहीं सोचा कि आपकी एक आवाज पर अनपढ़ आदमी अपने फूल से बच्चे को पोलियो की दवा पिलाने बूथ पर ले जाता है और आप लोगों को थाली बजाकर कोरोना भगाने का उपेदश देते रहे. जो अमिताभ बच्चन एक मिनट भी गंवाए बगैर सीधे लीलावती अस्पताल पहुंचे. जो अनुपम खेर अपनी मां को सीधे अस्पताल लेकर गए. वो क्या क्या टोटके बता रहे थे.

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यही अमिताभ बच्चन कुछ दिन पहले लोगों को होम्योपैथी की दवा बता रहे थे उन्होंने ट्वीट किया- “होम्योपैथी का लाभुक होने की वजह से मैं उत्साहित हूं कि आयुष मंत्रालय कोरोना से लड़ने का प्रयास करते हुए आगे आया है. मैं प्रार्थना करता हूं कि ऐसी महामारी से बचने और उसका समाधान खोज निकालने में भारत दुनिया का नेतृत्व करे.”

लेकिन जब कोरोना हुआ तो अमिताभ बच्चन सीधे अस्पताल में दिखाई दिए. अमिताभ बच्चन का कद इतना बड़ा है कि उनके कहने पर लोग कोयला खाकर भी इलाज कर लें. कई लोगों ने होम्योपैथी पर इतना भरोसा भी किया होगा. कोई बड़ी बात नहीं कि वो लोग प्राण भी गंवा चुके हों.

अमिताभ बच्चन ने कोरोना कि इलाज सिर्फ होम्योपैथी पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने के लिए लोगों को प्रेरित नहीं किया, सरकार को खुश करने के लिए परिवार के साथ घंटा और थाली लेकर छत पर खड़े हो गए. उन्होंने कहा लिखा अमावस्या, महीने का सबसे अंधेरा दिन, वायरस, बैक्टीरिया, दानवी ताकतें अपनी अधिकतम क्षमता और ताकत के साथ!

तालियों और शंख के स्पंदन से वायरस की क्षमता नष्ट होती है या कम होती है.

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चांद नये नक्षत्र रेवती में प्रवेश कर रहा है.

सब मिलाकर जो वाइब्रेशन होगा उससे रक्त संचार बेहतर होगा.”

क्या अमिताभ बच्चन पॉजिटिव होने के बाद थाली दिया बगैरह लेकर घूम रहे थे. क्या आपको नहीं लगता कि अमिताभ बच्चन जैसे लोग समाज को प्रेरणा देते हैं. उनके कहने भर से काफी लोग ये मानने लगे होंगे कि थाली बजाने से कोरोना को नष्ट किया जा सकता है.

अमिताभ बच्चन ने कोविड-19 को इतने हल्के में लिया था कि उन्होंने 25 मार्च को एक ट्वीट कर बताया था कि मक्खी से कोरोना फैलता है. मक्खी कोरोना लेकर उड़े और मक्खी को कुछ न हो, जबकि इंसान की जिन्दगी खतरे में पड़ जाए! बात कुछ हजम नहीं हो रही थी. तभी स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल को सामने आना पड़ा और उन्होंने इस बात को गलत बताया जिसके बाद अमिताभ को यह ट्वीट भी डिलीट करना पड़ा.

लेकिन कोरोना बीमारी से अमिताभ का पीड़ित होना दुखद हैं. भगवान उन्हें जल्दी ठीक करे लेकिन सबके लिए सबक ये हैं कि हर नीम हकीम की बातों पर यकीन न करें. सिर्फ डॉक्टर की बात मानें , जब बीमारी होती है तो बचाने अमिताभ बच्चन के डायलॉग या ट्वीट नहीं आते.