देश में असहनीय महंगाई का खतरा और अमेरिका के चरणों में सरकार

नई दिल्ली : अफसोस इस बात का है कि देश की जनता से सरकार कुछ और कहती है और करती उसका उल्टा है. अमेरिका की तानाशाही के आगे भारत की सरकार नतमस्तक है और देश की जनता फिर से तेल की महंगाई सहने को मज़बूर है. माना अमेरिका ताकतवर है लेकिन अपनी संप्रभुता को ताक पर रखकर हर बात मान लेना भी तो ठीक नहीं.

केवल एक महीने पहले 28 मई, 2018 को वि‍देश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने दि‍ल्‍ली में कहा था कि‍ भारत केवल यूएन यानी संयुक्‍त राष्‍ट्र के कानूनों से बंधा है और उन्‍हें मानता है, वह यूएस (अमेरिका) के कानून मानने के लि‍ए भारत को मजबूर नहीं कि‍या जा सकता. स्‍वराज, अमेरि‍का के उन प्रति‍बंधों की बात कर रही थीं, जो उसने ईरान पर लगाए थे. अमेरिका उसी ईरान पर प्रतिबंध लगाने को कह रहा है और सरकार चुप है जिससे वो भारत पाइपलाइन के जरिए तेल लाने वाला था.

भारत ईरान से बड़ी मात्रा में कच्‍चा तेल खरीदता है. इस बयान के ठीक 30 दि‍न बाद यानी 28 जून 2018 को पेट्रोलियम मंत्रालय ने ऑयल रिफाइनिंग कंपनियों से नवंबर तक ईरान से तेल इंपोर्ट ‘भारी कटौती या खत्म करने’ के वास्ते तैयार रहने के लिए कहा है. अफसोस कि इस मामले पर सब मौन हैं खास तौर पर विपक्ष और मीडिया की चुप्पी चिंतित करने वाली है

अमेरि‍की धमकी

अमेरिका ने भारत और अन्य देशों से 4 नवंबर तक ईरान से तेल का इंपोर्ट खत्म करने या प्रतिबंधों का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा है. इस प्रकार अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी देश को इससे छूट नहीं दी जाएगी.

अमेरिका ने भारत, चीन सहित सभी देशों से ईरान से कच्चे तेल का आयात चार नवंबर तक बंद करने को कहा है. इस तिथि के बाद भी वहां से तेल मंगाने वाले वाले देशों के खिलाफ उसने आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है और कहा है कि इस मामले में ‘रत्ती भर भी ढील नहीं बरती जाएगी.

भारत में इराक और सऊदी अरब के बाद सबसे ज्यादा कच्चा तेल ईरान से मंगाया जाता है. 2017-18 के पहले दस महीनों (अप्रैल-जनवरी) में ईरान से1.84 टन तेल आया था.

 

पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते से हटने की घोषणा की थी. साथ ही अमेरिकी प्रतिबंधों को फिर से लगाने का ऐलान किया था जो समझौता होने के बाद हटा लिए गए थे.

 

उस समय ट्रंप प्रशासन ने विदेशी कंपनियों को उनकी वाणिज्यिक गतिविधियों के हिसाब से ईरानी कंपनियों के साथ कारोबार बंद करने के लिए 90 से 180 दिन का समय दिया था. अब अमेरिका भारत और चीन सहित सभी देशों पर ईरान से कच्चे तेल की खरीद पूरी तरह बंद करने के लिए दबाव बना रहा है.

अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि सभी देशों को चार नवंबर तक ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद करना होगा. अधिकारी से जब पूछा गया कि क्या भारत और चीन को भी ईरान से तेल का अयात रोकने को कहा गया है तो उसने कहा ‘चीन और भारत पर, हां, निश्चत रूप से . अधिकारी का तात्पर्य था कि यह पाबंदी भारत और चीन पर अन्य सभी देशों पर लागू होगी.

भारत और चीन ईरानी कच्चे तेल के प्रमुख आयातकों में हैं. अधिकारी ने कहा कि भारत और चीन की कंपनियों को ईरान से तेल का आयात बंद नहीं करने पर 2015 से पहले लगाए गए प्रतिबंधों का फिर सामना करना पड़ेगा. ”हम सभी देशों से आग्रह कर रहे हैं कि वे ईरान से कच्चे तेल के आयात को शून्य पर लाएं.

एक सवाल के जवाब में अधिकारी ने कहा कि इन देशों को अभी से ईरान से तेल आयात कम करना चाहिए और चार नवंबर तक इसे पूरी तरह बंद करना चाहिए. अधिकारी ने कहा कि यह ट्रंप प्रशासन की ईरान के आर्थिक स्रोत बंद करने की रणनीति का हिस्सा है.