अलका लांबा पत्रकारों से कर सकती हैं बातचीत, नये बड़े एलान का खतरा

अल्का लांबा के आम आदमी पार्टी से इस्तीफे का मामला अब और बड़े बवाल में तब्दील हो सकता है. खबर है कि अल्का लांबा अब खुल कर एक प्रेस कांफ्रेंस सकती है और ये प्रेस कांफ्रेंस आम आदमी पार्टी पर बड़ा हमला बोल सकती हैं ये भी मुमकिन है कि वो आम आदमी पार्टी को लेकर कुछ और खुलासे करें.

दरअसल दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस अगले चुनाव के लिए जो दोस्ती का दही जमाने में लगे थे उसे जमने से पहले ही इस विवाद ने मथ दिया है. पार्टी की हालत अजीब हो गई है और बौखलाहट में उसने अपनी सबसे फायरब्रांड नेता अल्का लांबा को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. दर असल आम आदमी पार्टी ने आधी रोटी पर दाल लेते हुए राजीव गांधी का भारत रत्न वापस लेने का बीजेपी का मुद्दा उठा लिया . इस मुद्दे का न तो दिल्ली की राजनीति से कुछ लेना देना था ना दिल्ली को इसमें कुछ नहीं करना था. फिर भी उसने विधानसभा में कथित रूप से प्रस्ताव पारित किया कि राजीव गांधी का भारत रत्न वापस लिया जाए.

पुरानी कांग्रेसी अल्का लांबा इससे बिफर गई. उन्होंने इस प्रस्ताव के विरोध में सदन से वॉक आउट कर दिय. वॉक आउट के बाद उन्होंने कहा था कि इसका जो भी परिणाम होगा वह भुगतने को तैयार हैं. हालांकि बाद में आम आदमी पार्टी ने बाद में इस प्रस्ताव पर यू-टर्न ले लिया. कहा कि प्रस्ताव सदन में पास हुआ ही नहीं. स्पीकर ने भी कैमरे के सामने आकर इस पर सफाई दे दी.

इस बीच अल्का लांबा ने कहा, “मेरे वॉक आउट के बाद मुख्यमंत्री ने मुझे मैसेज किया कि मैं अपना इस्तीफा दे दूं.” विधायकी छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा, “मैंने पार्टी की टिकट पर चुनाव जीता है, पार्टी चाहती है तो मैं इस्तीफा देने को तैयार हूं.”

लांबा ने आगे कहा, “राजीव गांधी ने देश के लिए कई बलिदान दिए हैं और विधानसभा में मैंने उनका भारत रत्न वापस लेने के प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया. पार्टी ने मुझसे इस्तीफा मांगा है क्योंकि मैं पार्टी के फैसले के खिलाफ खड़ी हुई.” वहीं, खबर है कि इस मामले में सोमनाथ भारती को प्रवक्‍ताओं के पैनल से हटा दिया गया है.

आम आदमी पार्टी का यू टर्न

इस मामले में आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि राजीव गांधी के भारत रत्न से जुड़ा प्रस्ताव मूल प्रस्ताव का हिस्सा नहीं था. उन्होंने कहा कि राजीव गांधी से भारत रत्न छीनने वाला हिस्सा सोमनाथ भारती ने अपने हाथ से लिखा था. उन्होंने कहा, “मूल प्रस्ताव में हमने 1984 के नरसंहार के दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मांग की थी. राजीव गांधी के भारत रत्न से जुड़ा अमेंडमेंट सोमनाथ भारती ने अपने हाथ से लिखा था. सदन में मूल प्रस्ताव पास हुआ लेकिन भारती का प्रस्ताव पास नहीं किया गया.”

हालांकि अलका लांबा ने बाद में इस संबंध में ट्वीट किया है, जिसमें राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने वाला हिस्सा हाथ से लिखा हुआ नहीं बल्कि प्रिंटेड नजर आ रहा है.

आज @DelhiAssembly में प्रस्ताव लाया गया की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी जी को दिया गया भारत रत्न वापस लिया जाना चाहिये, मुझे मेरे भाषण में इसका समर्थन करने को कहा गया,जो मुझे मंजूर नही था,मैंने सदन से वॉक आउट किया. अब इसकी जो सज़ा मिलेगी,मैं उसके लिये तैयार हूँ.

विधानसभा में पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया, ‘दिल्ली सरकार को गृह मंत्रालय को कड़े शब्दों में यह लिख कर देना चाहिए कि राष्ट्रीय राजधानी के इतिहास के सर्वाधिक वीभत्स जनसंहार के पीड़ितों के परिवार और उनके अपने न्याय से वंचित हैं.’

सदन ने सरकार को निर्देश दिए कि वह गृह मंत्रालय से कहे कि वह भारत के घरेलू आपराधिक कानूनों में मानवता के खिलाफ अपराध और जनसंहार को खासतौर पर शामिल करने के लिए सभी महत्वपूर्ण और जरूरी कदम उठाए. सिख दंगा मामले में हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार और अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई है.

आप विधायक जरनैल सिंह ने इस प्रस्ताव को पेश किया था. माना जा रहा है कि केजरीवाल सरकार ने सिख समुदाय के वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए यह कदम उठाया है.

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