मोदी जी ! इस बार भी मित्रों कहकर दुश्मनी निभा दी ?

बाजार में जाकर देखिए. जिस दुकान पर आराम से सामान मिल जाता था उस पर भीड़ है. आप कहेंगे जनता बेवकूफ है क्योकि आप तो देवता है. बाजार में जाकर देखिए. सब्जी की दुकान पर सब्जी के दाम दुगुने हैं और भीड़ है. इसलिए कि आपने सब्जी मंडी बंद करवा दी उससे किल्लत हो गई और लोग सोच रहे हैं कि सब्जी पता नहीं कब आएगी और मनमाने दाम पर सब्जियां खरीद रहे हैं. आप कह देंगे कि लोगों को संयम रखना चाहिए. लोग सामान जमा की जमाखोरी कर रहे हैं. क्योंकि आपने नेशनल टीवी पर कहा कि जमाखोरी मत करना. लोग समझ गए कि कुछ तो ऐसा है कि जमाखोरी करने की जरूरत है. राशन की दुकानों पर लाइनें लग गई हैं. इन सभी जगहों की भीड़ से इनफैक्शन नहीं होता क्या ?

कई जगह बाज़ार बंद कर दिए गए हैं. थोक मंडियां बंद हैं. मॉल में ताला है और दफ्तरों में छुट्टियां कर दी गई हैं. इसका नतीजा ये हुआ है कि रेल्वे स्टेशनों पर भीड़ लग गई . छुट्टियों का फायदा लेने के लिए लोग अपने घरों के लिए रवाना होने लगे. अब इतनी भीड़ होगी तो सिर्फ इनफेक्शन ही नहीं होगा बल्कि दिल्ली मुंबई जैसे बड़े शहरों में विदेशों से आई बीमारी गांव गांव पहुंच जाएगी. लेकिन आप के शिष्य कहें. चेले कहें, भक्त कहें या समर्थक वो कहेंगे कि इस देश के लोग घटिया हैं. पर आप तो इस देश की नब्ज पहचानते हैं ना. आपको नहीं पता था कि लोग ऐसा करते हैं. लेकिन ईवेंट हो. हर हर के नारे हों तो कहां कोई जनता की सोचता है. 

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कोरोना के नाम पर जो अजीबोगरीब हरकतें आप करवा रहे हैं उनके बगैर ही डॉक्टर साल भर एक से एक अच्छे इनफैक्शन और सुपरबग का मुकाबला करते हैं. उनको कोई इन्जेक्शन नहीं लगा होता जिससे इनफैक्शन उनके पास न आए. वो मूलभूत सावधानियों से सालों से हर तरह के इनफैक्शन का मुकबाल करते हुए दीर्घ जीवन जीते हैं.

फर्क सिर्फ इतना है कि उनके तरीके में ड्रामा नहीं है. ईवेंट नहीं है. सब बालकनी में थाली बजाएगे तो लगेगा कि कोई है जिसने इन्हें काम पर लगाया हुआ है. डॉक्टर अपने हाथ की सफाई का ध्यान रखते हैं उनके हाथ पर कुछ भी लगे वो ठहरने नहीं देते. खुद के सांस के रास्ते सुरक्षित रखते हैं. इसके अलावा तीसरा काम किए बगैर वो करोना जैसे फ्लू को तो छोडिए एचआईवी और टीवी जैसे खतरनाक संक्रमण का मुकाबला कर लेते हैं.

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पता नहीं क्यों आपको आठ बजे खड़े होकर कुछ क्रांतिकारी करने के नाम पर कुछ भी कर देने की आदत है. भक्त इसे सही मानते हैं तो समझा जा सकता है. सबका सोचने का स्तर होता है. लेकिन आपके पास तो देश का सबसे बेहतर टेलेन्ट हैं. संक्रामक बीमारियों के एक्सपर्ट हैं. पूरा स्वास्थ्य मंत्रालय है. वैज्ञानिकों की बड़ी टीम है. आप ऐसे अच्छी भली जनता को जनता कर्फ्यू के नाम पर घरों से निकाल कर भीड़ में ले जाएंगे तो बीमारी बढ़ेगी या घटेगी. आपको भाषण देना है तो संसद चलती रहेगी. आपको धर्म की राजनीति करनी है तो अयोध्या में बड़ा आयोजन होगा.

सच सच बताइए आपको जनता से प्यार है या खेल तमाशे में रहना और लोगों के दिमाग में बने रहने के लिए दुनिया को बहटियाते रहते हैं. बीमारी फैल रही है. संदिग्धों की जांच के पूरे इंतजाम नहीं हैं. आपके हैल्पलाइन पर कॉल करने पर भी कुछ नहीं हो रहा.

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सोशल मीडिया पर झूठ फैल रहा है. जनता को झूठे संदेशों से भरमाया जा रहा है लेकिन आपके सारे विभाग मजे में हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं. मास्क और सेनिटाइजर का हौआ बना है और वो मनमाने दाम में बिक रहे हैं.कहीं कोई एक्शन नहीं हो रहा. थाली बजवाते रहिए. डॉक्टरों को सम्मान देना है तो ऐसे हालात बनाइए कि उन्हें हड़ताल न करना पड़े. सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए सामान मिलता रहे. आप ही हैं जिन्होंने लोकसभा में 2019 में नेशनल मेडिकल कमिशन बिल बनाया. डॉक्टर हड़ताल करते रहे लेकिन उन्हें सम्मान नहीं मिला. डॉक्टर ईमानदारी से इलाज नहीं कर पा रहे क्योंकि आपको कॉर्पोरेट अस्पतालों से प्यार है और वो डॉक्टरों का शोषण करते हैं. लेकिन आपको लगता है कि थाली बजाने से उनका सम्मान हो जाएगा. मुझे पता है आपको ऐसा नहीं लगता आपको पता है कि थाली डॉक्टरों के सम्मान में नहीं बजेगी. आपके अनुष्ठान का हिस्सा होगी. ईवेंट मैनेजमेंट होगा. याद रखिए बीमारी को रोकने से  ज्यादा आपने उसे फैलाने का इंतजाम कर दिया है. और दोष उनको ही दिया जाएगा जो थाली बजाने से मना कर रहे हैं.

पत्रकार गिरिजेश वशिष्ठ का फेसबुक पोस्ट