अब मेडिकल स्टोर पर नहीं मिलेंगी 6000 मामूली दवाएं

अब मेडिकल स्टोर पर सिरदर्द, जुकाम, दस्त, पेट दर्द जैसी 300 से अधिक दवाएं नहीं मिलेंगी. केंद्र सरकार ने ऐसी दवाओं पर रोक लगा दी है. इन दवाओं पर कई ऐसी दवाएं हैं, जिनका नाम प्रत्येक व्यक्ति को पता है. यह दवाएं डॉक्टर के पर्चे के बिना दुकान पर आसानी से मिल जाती है. इन दवाओं का कारोबार करीब 4 हजार करोड़ रुपये का है. यह दवाएं फिक्सड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) हैं. जिसके पास डॉक्टर के पैसे नहीं है वो छोटी छोटी बीमारियों के लिए भी या तो सरकारी अस्पताल जाए या बीमारी से मरे.

6 हजार से अधिक हैं ब्रांड

इन दवाओं की प्रसिद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग घरों में यह दवाएं हमेशा से रखते आ रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इनका सस्ता होना और मामूली पीड़ा के लिए इनका सेवन करना.

देश में इन दवाओं के करीब 6 हजार से अधिक ब्रांड हैं, जिनमें से सेरिडॉन, डीकोल्ड, फेंसिडिल, जिंटाप काफी प्रसिद्ध हैं.  इस कदम से सन फार्मा, सिप्ला, वॉकहार्ट और फाइजर जैसी कई फार्मा कंपनियों को तगड़ा झटका लगा है.

लिस्ट में शामिल हैं 343 दवाएं

इस लिस्ट में 343 दवाएं शामिल हैं, जिनको एबॉट, पीरामल, मैक्लिऑड्स, सिप्ला और ल्यूपिन जैसी दवा निर्माता कंपनियां बनाती हैं. ड्रग टेक्नोलॉजी एडवाइजरी बोर्ड (डीएटीबी) ने मंत्रालय को इस तरह की सिफारिश दी है. डीएटीबी ने यह सिफारिशें सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल दिए गए आदेश पर दी हैं. अब सरकार ने इसे बैन करने की अधिसूचना जारी कर दी है. हालांकि लग रहा है कि कई कंपनियां सरकार के इस आदेश को कोर्ट में भी चुनौती दे सकती हैं.

मेडिकल स्टोर पर बिक्री होगी गैरकानूनी

इन 343 दवाओं पर प्रतिबंध लगाने के बाद मेडिकल स्टोर पर इनकी बिक्री गैरकानूनी होगी. अगर किसी मेडिकल स्टोर पर यह दवाएं बिक्री होते हुए पाएं गई तो फिर दवा निरीक्षक अपनी तरफ से उक्त मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा सकता है.

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