एक गलत फैसले से जुलाई में बेरोज़गार हो गए 50 लाख सेलरीड क्लास लोग, कुल दो करोड़ नौकरियां गईं

देश में अर्थव्यवस्था की हालत बेहद खराब है हालात ये हैं कि एक ही महीने में देश में पचास लाख वेतन भोगी या कहें कि सेलरीड क्लास के लोगों की नौकरी जा चुकी है. जी हां पचास लाख लोग एक झटके में खाली जुलाई में नौकरी गवां चुके हैं. इससे पहले भी इससे ज्यादा नौकरियां जा चुकी हैं.

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) के डाटा के मुताबिक अब तक इस संकट के चलते 18 करोड़ 90 लाख मिलियन यानी करीब 1 करोड़ 90 लाख लोगों को अपना रोजगार खोना पड़ा है.

अब भी वेतन भोगी की नौकरियां जाना चिंता की वजह बना हुआ है. CMIE डाटा के अनुसार अप्रैल, 2020 में 1 करोड़ 80 लाख लोगों को अप्रैल महीने में नौकरियां गंवानी पड़ी थी. हालांकि मई में यह आंकड़ा कम होते हुए 1 लाख पर आ गया था.

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इसके बाद जून में स्थितियों में सुधार देखने को मिला थी और 39 लाख लोगों को नौकरियां वापस मिली थीं. लेकिन एक बार फिर से कई राज्यों में लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने और प्रतिबंधों को लागू किए जाने के चलते 50 लाख लोगों को जुलाई महीने में रोजगार खोना पड़ा है. CMIE डाटा के अनुसार लॉकडाउन की शुरुआत से लेकर 31 जुलाई के बीच देश में करीब 1 करोड़ 90 लाख लोगों के रोजगार पर मार पड़ी है.

जुलाई में सुधार की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन बड़े पैमाने पर नौकरियां छिनने के चलते चिंता गहरी हो गई है. वेतन भोगी में नौकरियां जाने पर चिंता जताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वर्ग में नौकरियां आमतौर पर नहीं जाती हैं, लेकिन रोजगार छिनने के बाद दोबारा अवसर मिलना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है. ऐसे में इस वर्ग में नौकरियां जाना अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता का सबब है.

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इससे पहले CMIE ने अप्रैल के अपने डाटा में बताया था कि कोरोना संकट के चलते 12 करोड़ दस लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी है. मई में यह आंकड़ा कम होकर 10 करोड़ पर आ गया था और उसके बाद जून में यह घटते हुए 2 करो़ड़ 90 लाख ही रह गया था. अब जुलाई में यह 1 करोड़ 10 लाख ही रह गया है.

आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में 30 फीसदी नौकरीपेशान लोगों को अपनी नौकरियां खोनी पड़ी थीं, लेकिन जुलाई में यह आंकड़ा 3 फीसदी रह गया है. हालांकि अब भी यह बड़ा आंकड़ा है. लॉकडाउन खुलने के बाद इकॉनमी में रिकवरी की उम्मीद की जा रही है, ऐसे में वेतन भोगी को झटका चिंता का कारण बन रहा है.