50 दिन और टल सकती है निर्भया के दोषियों की फांसी, जानिए कैसे

निर्भया केस के दोषियों की फांसी 22 जनवरी से कुछ दिन और आगे बढ़ सकती है. दिल्ली हाई कोर्ट में जारी सुनवाई में सरकारी वकीलों ने कहा कि दया याचिका खारिज होने के बाद भी 14 दिन का समय मिलता है. उसके बाद राष्ट्रपति को याचिका रद्द करने की वजह भी बतानी होती है. दोषी चाहें तो राष्ट्रपति के फैसले के आधार को भी चुनौती दे सकते हैं.

इन सभी परिस्थितियों के आधार पर माना जा रहा है कि फांसी का फैसला अभी थोड़ा टल सकता है. दोषी मुकेश ने कल क्यूरेटिव पिटिशन खारिज होने के बाद राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल की है. राष्ट्रपति अगर तत्काल उसकी याचिका रद्द कर देते हैं तो भी उसके पास अभी 14 दिन कम से कम हैं. और इस बीच मामला कोर्ट में जाता है तो कुछ और दिन दोषियों को मिल सकता है.

मामला इतना आसान भी नहीं है. अगर चारों दोषी एक एक करके दया याचिका लगाते हैं ( जैसा की अभी तक हो रहा है) तो कम से कम 50 दिन के लिए वो इस मुकदमे को टालने की हालत में हैं. ऐसी हालत में दया याचिका अगर खारिज भी होती है तो उसके आधार को भी चुनौती दी जाएगी.

इससे पहले डेथ वारंट के खिलाफ दोषी मुकेश की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में आज दोबारा सुनवाई शुरू हुई. दिल्ली सरकार की ओर से एएसजी राहुल मेहरा ने दलीलें रखीं. जस्टिस मनमोहन ने यह भी सवाल उठाया कि जेल अधिकारियों की ओर से दोषियों को पहला नोटिस जारी करने में इतनी देर क्यों हुई?

इस दौरान जज ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा- ‘यह साफ है कि कैसे दोषियों की ओर से सिस्टम का चालाकी के साथ दुरूपयोग किया गया. ऐसे में तो लोग सिस्टम से भरोसा खो देंगे.’

अब राष्ट्रपति के नाम मुकेश ने अपनी दया याचिका लगाने के लिए जेल प्रशासन को पत्र दे दिया है. यहां से बुधवार सुबह यह दया याचिका दिल्ली सरकार के होम डिपार्टमेंट में भेज दी जाएगी. जहां से केंद्रीय गृह मंत्रालय होते हुए इस याचिका को राष्ट्रपति के पास तक पहुंचा दिया जाएगा. इस पर फैसला कब होगा? इसका जवाब तो राष्ट्रपति के पास से ही मिल सकेगा. जेल अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति के पास मर्सी पेटिशन लगाने का इनके पास 21 जनवरी तक का समय है.