पुलिस की हर जांच का ये था तोड़, पैसे वालों को ऐसे लगाते थे चूना

किसी भी ठगी रैकेट से भी बड़ा था उनका ठगी रैकेट. Noida franchise fraud नाम की 30 करोड़ की ठगी करने वाले उन शातिर जालसाज़ों को पुलिस का हर तरीका पता था. वो हर वारदात के बाद मोबाइल का सिम ही नहीं बदलते थे. हैंडसेट भी फेंक देते थे. सोना, चांदी, मर्सडीज शानदार दफ्तर उनके वारदात के हथियार थे. ठगी के पैसे से शापिंग के लिए वो बाजार नहीं जाते थे. ड्राइवर को भेजते थे. सीसीटीवी हो या मोबाइल सर्विलेंस हर चीज़ का तोड़ उनके पास था. लेकिन पुलिस ने फिर भी अपराधी के भाई को पकड़ लिया. लेकिन सरगना अभी तक पुलिस के हाथ नहीं आया है. ये लोग फेक कंपनियां बनाकर लोगों को उनकी फ्रेंचाइजी देने के नाम पर पैसे लेते थे और एक बार पैसे हाथ में आते ही गायब हो जाते थे.

जालसाजी के बाद बचने के तरीके

सरगना राजेश कई नाम से काम करता था वो  राजेश आडवाणी, अरविंद गांधी, सुनील, रोहित वर्मा, सुनील, रोहित वर्मा, राहुल गुप्ता, विशाल और रॉबर्ट ब्लू के नाम से भी जाना जाता है. अब तक 32 लोगों ने ठगी की शिकायत की है. अभी तक 40 मामले इनके खिलाफ आए हैं.

जो सरगना का भाई पकड़ा गया है  उसके नाम सुनील मिस्त्री (इंदिरानगर), सुनील कुमार (मेरठ), रविंद्र (साहिबाबाद) और अंकुर (इंदिरापुरम-क्लाउड 9 सोसायटी) के रूप में हुई है. गिरफ्त में आया अंकुर मुख्य आरोपी राजेश कुमार का सगा भाई है.

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नोएडा का फ्रेंचाइजी घोटाला

नोएडा पुलिस ने करीब 30 करोड़ की ठगी के इस चर्चित मामले में 4 लोगों को शुक्रवार रात सेक्टर-63 के सी ब्लॉक से थाना फेज- 3 पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. गैंग का सरगना राजेश फरार है. पकड़े गए जालसाजों के कब्जे से मर्सिडीज समेत 5 कार, 3 किलोग्राम सोना व जूलरी, तीन फ्लैट के डॉक्युमेंट्स, 13.5 लाख रुपये कैश, 27 मोबाइल और 63 लैपटॉप समेत करीब 8-10 करोड़ रुपये का सामान बरामद हुआ है.

हर कागज नकली मिला

इसके अलावा 117 एटीएम कार्ड, 96 चेकबुक, 69 पैन कार्ड, 9 आधार कार्ड, 19 वोटर कार्ड, 17 ड्राइविंग लाइसेंस, 23 मुहर भी मिली हैं. साथ ही 56 लाख रुपये पुलिस ने सेक्टर-63 स्थित एक बैंक अकाउंट से फ्रीज कराए हैं. सेंट्रल जोन के डीएसपी हरीश चंदर ने बताया कि थाना फेज-3 में फ्रेंचाइजी देने के नाम पर ठगी करने के आरोप में 8 केस दर्ज हुए थे. जांच के बाद सेक्टर-63 से 4 लोगों को अरेस्ट किया गया.

सरगना जा चुका है जेल

सरगना राजेश कुमार साल 2014 में ठगी के मामले में दिल्ली से जेल जा चुका है. जेल से छूटने के बाद उसने नोएडा का रुख किया. 2019 में उसने सेक्टर-63 स्थित C-50 और E-29 में कंपनी खोली थी. यहां अपने छोटे भाई अंकुर और अन्य तीन लोगों के साथ मिलकर ठगी का धंधा शुरू कर दिया.

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दस से ज्यादा फर्जी कंपनियों का मालिक

इन लोगों ने हाइपरमार्ट, वेस्टलैंड प्राइवेट लिमिटेड, लुइस सैलून, मिडवे कैफे, साउथलैंड प्राइवेट लिमिटेड, डैकफैस्टर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बना रखी थी. इसके अलावा अन्य कई कंपनियों जाने की भी बात सामने आई है.

सोशल मीडिया से करते थे मार्केटिंग

आरोपी फर्जी कंपनी बनाकर यू-ट्यूब और गूगल पर मोबाइल नंबर देकर कंपनी का प्रमोशन कराते थे. फ्रेंचाइजी के लिए कॉल करने वालों को सेक्टर-63 स्थित दफ्तर बुलाया जाता था. यहां उन्हें फ्रेंचाइजी के बदले कैश और चेक लेकर मोबाइल नंबर बंद कर देते थे. फर्जी कंपनी बनाने के लिए आरोपी कंपनी में जॉब से संबंधित इंटरव्यू देने के लिए आने वाले लोगों के डॉक्युमेंट्स का गलत इस्तेमाल करके कंपनी रजिस्टर करवा लेते थे.

गोल्ड खरीदने के लिए आरोपी अपने ड्राइवर का शोरूम में भेजते थे. ड्राइवर फर्जी कंपनियों के डॉक्युमेंट्स पर गोल्ड व अन्य सामना खरीदता था. पुलिस का कहना है कि आरोपी सीसीटीवी फुटेज में आने से बचने के लिए ऐसा करते थे.