पीएम मोदी ने चुनाव आयोग से छिपायी अपनी प्रॉपर्टी, मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चुनावी हलफनामे में उनको गांधीनगर में आवंटित किए गए प्लॉट की जानकारी नहीं देने पर इसकी जांच एसआईटी से कराने की मांग की गई है. महाराष्ट्र के साकेत गोखले से सोमवार को यह याचिका दायर की.

आपको याद होगा कि इससे पहले पीएम मोदी पर अपनी वैवाहिक स्थिति और शिक्षा को छिपाने के आरोप लगते रहे हैं.

गोखले ने आरोप लगाया कि अक्तूबर 2002 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्हें सरकारी नीति के तहत गांधीनगर में एक जमीन आवंटित की गई थी. 2007 के विधानसभा चुनावों में दायर किए गए हलफनामे में मोदी ने अपनी संपत्तियों में इस प्लॉट की जानकारी दी थी. 

याचिका में कहा गया है कि सरकारी नियमों के अनुसार आवंटित की गई जमीन को जिला कलेक्टर या 2012 से गुजरात हाईकोर्ट की अनुमति के बगैर बेचा, स्थानांतरित या उपहार में नहीं दिया जा सकता. 2012 और 2014 में मोदी ने अपने चुनावी हलफनामे में उक्त प्लॉट की जानकारी नहीं दी है.

लिहाजा गुजरात सरकार को जमीन के मालिकाना अधिकार वाली सभी दस्तावेज पेश करने और सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस की अगुवाई में एसआईटी गठित कर मोदी अचल संपत्ति की जांच करने का निर्देश दिया जाए.