क्या धीरे धीरे सभी सरकारी नौकरियां कच्ची हो जाएंगी ?

भारतीय सरकार द्वारा अग्निपथ योजना को देश के सैनिकों के लिए इसी महीने 14 जून 2022 को प्रस्तावित किया गया था। जिसको लेकर देश के कई भागों में लोगों ने जमकर अपना आक्रोश प्रकट किया। जो अभी भी पूरी तरह थमा नहीं है और सरकार तथा भारतीय सेना के जनरल अनिल पुरी ने फैसला बदलने से साफ इनकार भी कर दिया है।

लेकिन अभी भी यह हलचल थमती नजर नहीं आ रही है। इसी बीच सरकार द्वारा एक और अहम फैसला लिया गया है जिसके तहत सरकार ने कोरोनाकाल को ध्यान में रखते हुए आउटसोर्सिंग पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। इस नए नियम में यह कहा गया है, कि केंद्र से राज्यों तक स्थाई नौकरियों की जगह ठेका भर्तियों को मंजूरी दी जाएगी। इसी के अंतर्गत यूपीएससी की भर्ती भी आधी कर दी गई है, जिसमें पहले कर्मियों को 2 साल के ठेके पर रखा जाएगा। जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय ठेका कर्मी 2 साल में 12 लाख बढ़े हैं और स्थाई 10 साल में 5 लाख घटे हैं। और आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो केंद्र सरकार ने 2021 में 20 के मुकाबले 27% कम रेगुलर भर्तियां की और वही ट्रेंड राज्यों में भी रहा।

क्या रहा अब तक नौकरियों का हाल?

बात की जाए 2017 की तो तब केंद्र हर महीने के हिसाब से औसतन 11 हजार स्थाई नौकरियां दे रही थी, और 2019 में देश में कुल 13.64 लाख कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे थे और अब यानी 2021 से ही यह संख्या बढ़कर 24.31 लाख कर तक पहुंच गई है। और वहीं देखा जाए तो जहां 2020 में कुल स्थाई नौकरियां 1.14 लाख की गई थी तो अब यह संख्या घटाकर 87,432 कर दी गई है।

ठीक इसी तरह भारत के विशाल राज्य यूपी की बात की जाए तो वहां पर भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा भी अब सरकारी नौकरियों को कॉन्ट्रैक्ट बेस पर शुरू करने की तैयारी की गई है। जिसके तहत सरकारी नौकरी मिलने के बाद आप तुरंत प्रमाणित या पक्के नहीं होंगे। यह नियम ग्रुप ‘बी’ और ग्रुप ‘सी’ कर्मचारियों पर लागू होगा। इसमें हर 6 महीने में आपके प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके मुताबिक आपको अंक दिए जाएंगे और साल में अगर यह अंक प्रतिशत से कम हुए तो समझ लो आपकी नौकरी गई। इसी परफॉर्मेंस के आधार पर 5 सालों में आपकी छंटनी होगी। अगर आप छंटनी से बच गए तो फिर 5 साल बाद आपकी पक्की नौकरी भी लग सकती है।

सरकार के इस प्रस्ताव पर होने वाले नुकसान-

1) काम सभी के बराबर लेकिन वेतन कम।

2) सरकारी सुविधाएं जैसे पीएफ, इंश्योरेंस, टीडीए और किसी तरह के अलाउंस नहीं मिलेंगे।

3) 5 साल तक काम करने के पश्चात भी नौकरी पक्की होने की गारंटी नहीं।

4) ऊपरी अधिकारियों के हाथ में होगा करियर, की नौकरी पर रखना है या नहीं?

5) 5 साल बाद भी नौकरी तब मिलेगी जब बकायदा परीक्षा और इंटरव्यू में पास होंगे।

6) नौकरी पाने के लिए भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।

7) SC, ST, OBC के बीच में प्रतिस्पर्धा और जातिवाद बढ़ेगा।

8) आरक्षण व्यवस्था का ठीक से पालन कर पाना मुश्किल होगा।

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