मोदी जी पहले अपना चालान करो, फिर अपने अफसरों का, तब हमारा नंबर आएगा

मोदी ठाकुर, जाओ पहले उसका चालान काटो जिसने सड़क पर सांडों का चालान नहीं किया. जाओ उसका चालान काटो जिसे सड़क के गड्डे नहीं दिख रहे . जाओ उसका चालान करके आओ जिसकी खोखली सड़क में पूरी बस घुस जाती है. जाओ उसका चालान करके आओ जो शाम को सड़क पर अतिक्रमण करने वालों से पैसे की वसूली करता है. जाओ चालान करो उन निकम्मों का जो बिजली नहीं दे पा रहे और जनरेटर काला धुआं उगलने को मजबूर हैं. जाओ उसका चालान काटो जिसने गंदे नालों को यमुना में मिलाकर उसे प्रदूषित किया है.

ठाकुर, हमारे हैलमेंट न लगाने से सिर्फ हमें ही खतरा है सांड से सौ लोगों को खतरा है. तुम्हारे आदमियों ने ही इ साडों को पूजा कर कर के सड़क पर बढाया है. तुम्हारे लोगों की गाय ही सड़क पर पन्नी खाने के लिए घूमती है. उनपर करो हज़ार गुना जुर्माना. हम पर ज़ोर चलता है ठाकुर थोड़ा अपने उन अफसरों पर भी भी चलाओ जो पैसे खाकर सडकें खोखली बना देते हैं. हमारी तो अपनी जान का जोखिम है लेकिन इन लोगों से तो लाखों लोगों की जान को कई गुना ज्यादा खतरा है. करोगे चालान . कितने का करोगे चालान ठाकुर. इधर उधर ताकने से नहीं चलेगा ठाकुर को कालियाओ और धोलियाओ नज़रें मिलाकर बताओ मेरे स्कूटर से ज्यादा प्रदूषण होता है या तुम्हारे निक्म्मेपन के कारण बिजली न आने से. डीजल जनरेटर का धुआं ज्यादा होता है या स्कूटर का. मेरी कार ज्यादा प्रदूषण कर रही है या तुम्हारे नाले जो नदी में तुमने उंडेल दिए हैं.

हमारी गाड़ी आधे घंटे सडक के किनारे खड़ी हो जाए तो तुम्हें बहुत मिर्ची लगती है. तुम्हारे नेता की वो मिठाई की दुकान कितनी बाहर थी और कितने साल से बाहर थी जिसे अल्का लांबा ने उठाकर फेंक दिया था ? तुम्हारे मुख्यालय पर कितनी गाड़िया सड़क पर पार्क होती है. जब सरकार में तुम जीते तो पूरी सड़कों पर गाड़ियां पार्क थीं. कितने फाइन किए. पुराने रेट से ही सही किये थे क्या. तुम बताओ तुम्हारी गाड़ी पर लगा पार्टी का झंडा चालान न होने की गारंटी क्यों बन गया है. बताओगे ठाकुर.

कालियाओ और धोलियाओ, बार बार गुण गान कर रहे हो ना कि विदेशों के ठाकुर जनता पर मोटा जुर्माना लगाए हैं. तुम्हारा ठाकुर नरम है जाओ पता करो. उन देशों में चालान से कुछ बदला क्या. जाओ पता चलाओ कि वहां भी ऐसा ही निकम्मा ठाकुर का गैंग है क्या ?

तुम तो पता लगाओगे नहीं कि वहां बिजली कितने घंटे आती है. पता नहीं लगाओगे कि वहां किसी उद्योगपति का ज्यादा पेट्रोल डीजल बिकवाने के लिए कोई बिजली काटता है क्या. बहुत जानकारी लाते हो तो बताओ कि वहां गाय सांड को ऐसे ही सड़कों पर पाला जाता है. तुम नहीं पूछोगे क्योंकि पूंछ पकड़कर तो तुम चुनाव की नैया पार करते हो.

तुम बताओगे कि उन देशों में पार्किंग की जगह होती है या नहीं. वहां भी तुम्हारी पार्टी के नेता फुटपाथ पर अवैधपार्किंग चलाते है और झूठी पर्चियां बांटकर जेबभरते हैं. वहां भी तुम्हारी जैसी नगर निगम है जो पार्किंग का इंतज़ाम तक नहीं कर पाती और जिसके अफसर खुद अपने दफ्तर के बाहर सड़कों पर गाड़ी पार्क करते हैं.

आम आदमी ही मिलता है तुम्हें लूटने को. हमारा दो मुट्ठी अनाज भी तुमसे बर्दाश्त नहीं होता. कुछ तो बोलो ठाकुर. तुम नहीं बोल सकते तो कालिया , धोलिया बोलें. कोई तो बोले.  

पत्रकार गिरिजेश वशिष्ठ का फेसबुक पोस्ट