मेडीक्लेम कंपनियां कैसे पूरी दुनिया में मचा रही हैं तबाही, आपका क्लेम भी नहीं देते

मेडीक्लेम कंपनियां कैसे पूरी दुनिया में मचा रही हैं तबाही, आपका क्लेम भी नहीं देते

खाने पीने के मामले में पर्याप्त भोजन नहीं ले रहा था इसलिए बीमार हुआ
शाकाहारी होना उसकी गलती नही धी
गलत आधार पर क्लेम रोका गया
मीत ठक्कर नाम का एक मरीज था. उसने कमजोरी, चक्कर आना उस्टी जैसी फीलिंग थी
इसके साथ ही उसे शरीर के बायें हिस्से में भाररी पन था
उसे 2015 में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था
उसे ट्रांजियेन्ट इस्चेमिक अटैक यानी टिआ नाम की बीमारी का मरीज माना गया
उसका होमो सिस्टीन लेवल 23.52 पाया गया जबकि इसकी नार्मल रेंज 5 से 15 होती है
लेकिन न्यू इंडिया एश्योरेंस ने इसे क्लेम देने से इनकार कर दिया
डाक्टरों की राय दी गई और हाईपर होमो सिस्टीमिया का कारण विटामिन बी 12 की कमी मानी गई
डाक्टर का कहना था कि विटामिन बी 12 की कमी का कारण खान पान में कमी थी
उसके भोजन में सप्लीमेंट्स की कमी थी.
ठक्कर साहब ने कंज्यूमर कोर्ट का रास्ता पकड़ा और केस किया
अदालत ने माना कि शाकाहारी होने के कारण उन्हें कुछ खास पोषण तत्वों की कमी थी लेकिन इसमें उनका कोई दोष नहीं था
शाकाहारी लोगों में बी 12 की कमी आम है लेकिन बीमा कंपनी ने इसे गलत तरीके से अपने फायदे में इस्तेमाल किया.
अदालत ने आदेश दिया कि ठक्कर साहब को 1 लाख रुपये 9 परसेंट ब्याज के साथ लौटाए जाएं
इसके अलावा कोर्ट ठक्कर को 5000 रुपये मुआवजे के तौर पर देने का भी आदेश दिया

बीमा कंपनियों के खेल
सर्जरी के बीच में किसी व्यक्ति को 85000 रुपये की कोई डिवाइस लगाने की जरूरत थी. कंपनी ने मना कर दिया. कहा 3500 मिलेगंग
अमेरिका में 4.1 परसेंट है जबकि भारत में सिर्फ दशमलव 4 परसेंट
पेमेन्ट रेशियो का खेल
95 परसेंट रेशियो का मतलब है केस प्रोसेस हए पेमेन्ट हुआ या कम हुआ इसकी को ई गारंटी नही है
अगर आपको पता नहीं है कि क्या कवर्ड है क्या नहीं तो आपका क्लेम कम पैसे का सेटल होगा
पहले से नहीं बताया. रिजेक्ट कर देगा
Medical inflation in India is around 14%, which means that any medical procedure that costs Rs 3 lakh today, could cost around Rs 6 lakh 5 years down the line.

इस आधार पर क्लेम गायब कर दिया जाता है
भारत में सेहत पर जीडीपी का सिर्फ 4 परसेंट खर्च किया जाता है. जबकि अमेरिका में 17 परसेंट जितना बीमा ज्यादा होगा सरकार की कमाई उतनी ज्यादा

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