दिल्ली के दंगों के लिए इन नेताओं को मन से माफ करेंगे क्या ?

उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगों से 40 से ज्यादा लोग मारे जा चुके है शांति पूरी तरह अब भी नहीं हैं माहौल में जहर भरने वाले शांति मार्च निकाल रहे हैं लेकिन सच ये हैं कि नागिरकता कानून का राजनीतिक हल न निकालकर बीजेपी ने आंदोलन को ही निशाने पर लेने का जो तरीका अपनाया उसने भारतीय समाज में गहरे तक जहर भर दिया. नतीजा .ये हुआ कि धीरे तनाव असुरक्षा में बदल गया. इस चुनाव में झूठे और भड़काऊ बयानों ने समाज में हिंसा के बीजे बोये. आपको बताते हैं वो सभी बातें जो धीरे धीरे लोगों के दिमाग में घर करती गईं और बारूद बनकर फट पड़ीं. एक तरफ नफरत थी तो दूसरी तरफ इन बयानों से पनपी असुरक्षा. हालात बिगड़ते चले गए. ये वह बयान जिन्होंने आग में ईंधन डाला.

प्रवेश वर्मा

दिल्ली से बीजेपी के सांसद परवेश वर्मा ने चुनाव प्रचार के दौरान एक कार्यक्रम में कहा था कि शाहीन बाग के लोग आपके घरों में घुसेंगे और बहन-बेटियों को उठाकर ले जाएंगे. आज समय है. कल मोदी शाह बचाने नहीं आएंगे. इतना ही नहीं. उग्र हिंदू छवि वाले योगी आदित्यनाथ की सभाएँ जानबूझकर शाहीन बाग और मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में रखी गईं और वहां उन्होंने भड़काने वाले बयान दिए

योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार के दौरान शाहीन बाग पर कई बयान दिए थे. उन्होंने कहा था कि कश्मीर में बिरयानी खिलाने का काम कांग्रेस करती थी और दिल्ली में आम आदमी पार्टी वही काम कर रही है. उन्होंने धरने का पाकिस्तान से कनेक्शन बताया और कहा कि इन लोगों को बिरयानी खिलायी जा रही है और पाकिस्तान से इनके समर्थन में बयान आ रहे हैं. योगी संवैधानिक पद पर बैठे नेता थे लेकिन उनके ऐसे बयान लोगों के दिमाग में नफरत भर रहे थे. इसी वजह से उनके प्रचार पर प्रतिबंध भी लगाया गया. अनुराग ठाकुर ने तो हदें ही पार कर दीं.

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अनुराग ठाकुर

प्रचार अभियान के दौरान केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा था कि बीजेपी के सत्ता में आते ही शाहीन बाग से प्रदर्शनकारियों को हटा दिया जाएगा. उन्होंने मंच से गोली मारो के नारे भी लगवाए थे, जिसपर विवाद भी हुआ था और चुनाव आयोग ने उनके प्रचार पर बैन भी लगाया था. लेकिन दिमाग में कहीं तो देश के गद्दार वाली बात अंकित हो ही गई . इसी का नतीजा था कि कई नौजवान भड़के एक 17साल का लड़का पिस्तौल लेकर प्रदर्शन कर रहे जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों को गोली मारने पहुंच गया. पूर्वी दिल्ली के दंगे शुरू करने कि दिन भीम आर्मी का प्रदर्शन चल रहा था. कपिल मिश्रा वहां पहुंचे और लाठियों से लेस अपने समर्थकों के साथ सीएए समर्थक मार्च के नाम पर जुलूस निकाला लेकिन इस जुलूस में सीएए के समर्थन में नहीं बल्कि एक सांप्रदायिक विशेष को भड़काने वाले सांप्रदायिक नारे लग रहे थे. यहीं से चिंगारी भड़की. ये वहां हुआ जो बेहद संवेदनशील जगहें थीं और जहां सीएए विरोधी की शुरुआत में हिंसा हुई थी. ये सभी इलाके सीलमपुर के आसपास के थे. कपिल मिश्रा इससे पहले भी भड़काऊ नारे देते रहे

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कपिल मिश्रा

मॉडल टाउन से बीजेपी के टिकट पर लड़ने वाले कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया था कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने शाहीन बाग जैसे मिनी पाकिस्तान खड़े किए हैं. जवाब में 8 फरवरी को हिंदुस्तान खड़ा होगा. इससे हिंदू बहुसंख्यक के मन में शाहान बाग के लिए घृणा पैदा हुई. केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तो हदें पार कर दीं. उन्होंने सीधे सीधे सीएए के विरोध को आतंकवाद से जोड़ दिया.

गिरिराज सिंह

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शाहीन बाग को सुसाइड बॉम्बर बनाने का अड्डा बताया था. गिरिराज सिंह ने कहा, ‘यह शाहीन बाग अब सिर्फ आंदोलन नहीं रह गया है, यहां आत्मघाती हमलावरों का जत्था बनाया जा रहा है. देश की राजधानी में देश के खिलाफ साजिश हो रही है.’ देश के गृहमंत्री जिन्हें कानून व्यवस्था को संभाला था वो खुद सीएए पर राजनीतिक पहल की जगह भड़काऊ बयान देते नजर आए. एक तरफ धरन की शांतिपूर्ण छवि थी तो दूसरी तरफ भड़काऊ बयानबाजी

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अमित शाह

दिल्ली के बाबरपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक जनसभा में कहा कि ईवीएम का बटन इतने गुस्से के साथ दबाना कि बटन यहां बाबरपुर में दबे, करंट शाहीन बाग के अंदर लगे. अमित शाह बोले कि CAA का विरोध करने वाले नेताओं ने दिल्ली में दंगे करवाए और लोगों को गुमराह करने का काम किया.

वारिस पठान की एंट्री

सीएए का राजनीतिक समाधान न निकालने का नतीजा ये हुआ कि इस तरह के बयानों की पूरी सीरीज शुरू हो गई. कम समझदार और भड़काऊ बयानों की राजनीति करने वाले दूसरे समुदाय के लोग भी अनाप शनाप बयान देने लगे. गुलबर्गा में एक सभा में बारिस पठान ने मंच से कहा कि हम 15 करोड़ ही 100 करोड़ के लिए काफी हैं. शाहीनबाग धरने की उन्होंने भी गलत छवि पेस करने की कोशिश की और कहा कि हमारी शेरनियां वहां बैठी हैं. मुस्लिम समाज इसके विरोध में टूट पड़ा लेकिन एक बार दिमाग ज़हरीले हो चुके हों तो हालत कैसे बदलते

इन बयानों का असर दो तरफा हुआ. एक तरफ हिंदू समाज में मुसलमानों और सेक्युलर लोगों के प्रति नफरत भरती गई तो दूसरी तरफ मुसलमान असुरक्षा के कारण तैयारियों में जुट गए. दोनों ही समुदायों ने हथियार इकट्ठे करने शुरू कर दिया. यही वजह रही कि हर समुदाय के घर की छत पर पत्तरों बगैरह इकट्ठे मिले. अफसोस ये है कि हाल के सालों की राजनीति में बयान देते समय जिम्मेदारी बरतने का रिवाज भी खत्म हुआ है और देश के सरकार की विनम्रता लगभग समाप्त हो गई है. यही कारण है कि समाज में नफरत घर करती जा रही है. (पत्रकार गिरिजेश वशिष्ठ का फेसबुक पर पोस्ट)