टीका कंपनियां कभी खत्म नहीं होने देंगी महामारी ? बिग फार्मा के मुनाफे देखकर आप हिल जाएंगे, ये लूट

1000 करोड़ डालर यानी 70 हजार करोड़ रुपये कमाए एक हफ्ते में इन्वेस्टर्स ने
जैसे जैसे ओमीक्रोन की न्यूज पैली इनकी कमाई शुरू ह गई
बर्नी सांडर्स लिखते हैं कि ये समय है जब फार्मास्यूटिकल कंपनियां दुनिया के साथ वैक्सीन का फार्मूला शेयर करें
और अपने लालच को काबू करने की कोशिश करें
बहुत हुआ
2020 में मॉडर्ना घाटे में चल रही थी इस साल मॉडर्ना ने 700 करोड़ डॉलर का मुनाफा कमाया
फाइजर ने इससे भी ज्यादा 8 बिलियन डॉलर का मुनाफा कमाया
फाइजर का मुनापा 2020 में 800 करोड़ डॉलर का था जो 2021 में 9000 करोड़ डॉलर हो गया है
124 परसेंट जंब
फाइजर एक डोज पर एक डॉलर का खर्चा करता है.
गार्जियन के मुताबिक फाइजर एक टीके पर एक डालर का खर्चा करता है.
यानी 97 पेंस और ये टीका यूके की सरकार को 30 डालर में बेचा जा रहा है
म़ॉडर्ना 4 सै तीस गुना दाम वसूलती है.
दक्षिण अफ्रीका से ती स डालर पर डोज की मांग मॉडर्ना ने की थी
ऑक्सफैंम के मुताबिक ये लागत का पचास गुना है
5 times expensive as it could be
बिग फार्मा कह सकते हैं कि वो रिसर्च और डवलपमेंट पर खर्च करते हैं. उसका खर्च भी निकालना बनता है.
इन दोनों कंपनियों को वैक्सीन बनाने के लिए सरकार ने पैसा दिया था
सरकारी फंड मिला था. अपना 250 करोड़ सरकार ने दिया
फाइजर को 200 करोड़
बायोएन टेक को जरमन सरकार से चार सौ पैंतालीस करोड़ रुपये मिले थे
दोनों सरकार से मोटा धन ले सकते है इसके बावजूद दाम तय करने का उन्हें हक है.
अलग देश से अलग पैसे वसूल रहे हैं
वो अपने पेटेन्ट को छोड़ने को तैयार नहीं है. डब्लू एचओ कह चुका ह सबको वैक्सीन मिलनी चाहिए. गरीब देशों तक पहुंच नहीं पा रही
डाक्टर फाउची की अध्यक्षता वाली एनआईएच से पैसे लेकर मॉडर्ना वैक्सीन बना रहा है.
तीन सरकार वैज्ञानिक इसमें शामिल हुए उन्होने वैक्सीन विकसित करने में योगदान दिया
जॉन मस्कोला
बार्नी ग्राहम
और किस्मेकिया कोरबेट
एनआईए का कहना है कि इन तीनों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
एनआईए कह रहा है उन्हें को इनवेन्टर घोषित किया जाना चाहिए
कंपनी इनका नाम को इनवेन्टर में डालना नहीं चाहती अगर उनका नाम पेटेन्ट में जाता है तो वो प्रोडक्ट के मालिक हो जाएंगे

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