गैस के दाम का बड़ा झटका सहने को तैयार हैं आप ?

कैसे तय होती है कीमत?
एलपीजी की कीमत तय करने के लिए इंपोर्ट पैरिटी प्राइज का फॉर्मूला यूज किया जाता है. इसमें क्रूड ऑयल की कीमत, समुद्री भाड़ा, इंश्योरेंस, कस्टम ड्यूटी, बंदरगाह का खर्च, डॉलर से रुपये का एक्सचेंज, माल ढुलाई, तेल कंपनी का मार्जिन, बॉटलिंग लागत, मार्केटिंग खर्च डीलर कमीशन व जीएसटी शामिल होता है
भारत आधे से ज्यादा नेचुरल गैस आयात करता है
एमएम बीटीयू
गैस का दाम बढ़ सकता है
ग्लोबल मार्केट में बढ़ी
एक्सपर्ट कमेटी रिपोर्ट देगी इस महीने के अंत तक
भारत में दो बार रिव्यू होती है
1 अक्टूबर से फसला लागू होगा
6.13 डालर एनबीटीयू
तीन से साढे डालर कम है
दस डालर अंतर्राष्ट्रीय दाम
गैस कंपनियां कह रही हैं कि गैसके दाम बढ़ाओ
कमेटी रिव्यू करती है. फिर कीमतें तय होती है
50 प्रतिशत एलएनजी फर्टिलाइजर कंपनियों के पास जाती है
बिजली बनाने में भी गैस का इस्तेमाल है
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवलर्क यानी घर में गैस और वाहनोंमें गैस
रिफायनरी ,
सब्सिडी वाले क्षेत्र है.
सीएनजी और पीएनजी तो महंगी होगी ही
सब्सिडी मिलेगी पावर सेक्टर और खाद सैक्टर को

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