कोरोना वारियर्स की ऐसी दुर्गति से कैसे जीतेंगे जंग ?

जब प्रदेश में कोरोना लगातार फैल रहा है और इसके साथ ही प्रदेश की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल रही है, तब प्रदेश की शिवराज सरकार सुविधाओं का विस्तार करने की बजाय उसे और सिकोडऩे के रास्ते पर चल पड़ी है. इस संवेदनशील समय में जब स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए, तब राज्य सरकार ने ईएसआइ से प्रदेश के सात लाख कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलने वाली मुफ्त स्वास्थ्य सेवायें बंद हो गई हैं

कर्मचारियों और उनके परिजनों को हार्ट, शुगर, किडनी के साथ ही उल्टी, दस्त, खांसी की दवायें भी ईएसआइ अस्पतालों और डिस्पेंसरियों से नहीं मिल पा रही हैं.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में कहा हैकि सरकार के गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण प्रदेश भर में कर्मचारियों और श्रमिकों के परिवारों को जीवन दांव पर लग गया है. ईएसआइ के डायरेक्टर का कहना है कि बजट न होने से सप्लायर को भुगतान न कर पाने के कारण दवायें उपलब्ध नहीं हैं. प्रश्र यह है कि बजट क्यों नही है.

सीपीएम का कहना है कि जब कर्मचारी के वेतन से चार प्रतिशत ईएसआइ को जमा होता है. तो फिर वो पैसा कहां गया है? उल्लेखनीय है कि इस चार प्रतिशत में से 3.25 प्रतिशत नियोक्ता और 0.75 प्रतिशत अंशदान कर्मचारी का होता है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मांग की है कि इस अव्यवस्था के लिए जो भी जिम्मेदार हो, उसेदंडित किया जाना चाहिए और तत्काल प्रभाव से दवाओं की सप्लाई में आ रही बाधा को दूर करकर्मचारियों और उनके परिजनों के जीवन के साथ हो रहा खिलवाड़ बंद होना चाहिए.