कैसे हैक की जा सकती है EVM Machine? How they hack EVM?

कैसे हैक की जा सकती है EVM Machine? How they hack EVM? 1. क्या ईवीएम में गड़बड़ी संभव है? उत्तर- जी बिल्कुल संभव है. इवीएम मशीन सॉफ्टवेयर से चलती है और आप सॉफ्टवेयर की गतिविधियों को देख नहीं सकते. किसी भी सॉफ्टवेयर में बदलाव संभव है. उसके लिए स्क्रू ड्राइवर की ज़रूरत नहीं होती. सॉफ्टवेयर एक वायरस की तरह मशीन में डाला जा सकता है और उन्हें हैक किय जा सकता है. 13 सितंबर 2006 में डाइवोल्ड इलैक्ट्रानिक वोटिंग मशीन को कैसे हैक किया जा सकताहै इसका बाकायदा प्रदर्शन किया गया. प्रिंस्टन के कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर Edward Felten ने एक मालवेयर लगाकर बताया कि बिना मशीन को छुए या उसके पास गए मशीन के मेमोरी कार्ड पर वोटों की संख्या को बदला जा सकता था. ये मॉलवेयर एक ऐसा वायरस अपने आप तैयार कर लेता था जो अपने आप एक मशीन से दूसरी मशीन तक चला जाता था. 2. किस तरह की गडबड़ी संभव है? उत्तर- a- किसी मशीन में दिया जाने वाला हर पांचवा, छठा या दसवां (जो भी वोट आप प्रोग्राम करें) अपने आप आपकी चहेती पार्टी के खाते में जा सकता है. मतदाता वही बटन दबाएगा बत्ती भी मतदाता के पसंद किए गए चुनाव चिन्ह के सामने जलेगी लेकिन वोट वहीं जाएगा जहां कि सॉफ्टवेयर डालेगा. b- ईवीएम में वोट उतने ही रजिस्टर रहें लेकिन ईवीएम से डाटा ट्रांसफर कर ते समय गणना वाले कंप्यूटर में बदल जाए और वो हैकर की मर्जी के आंकडे दिखा दे. 1. क्या ईवीएम में गड़बड़ी पहले भी हो चुकी है? उत्तर- जी हां 2005 में Black Box Voting नाम की संस्था ने पूरी ये साबित करने दिखाया कि किस तरह ईवीएम को हैक किया जा सकता है.लियोन काउंटी के में उन्होने एक मॉक चुनाव आयोजित किया और बाकायदा गड़बड़ी करके दिखाई. ये जानकारी तफ्सील से विकीपीडिया पर ली जा सकती है. 13 सितंबर 2006 में डाइवोल्ड इलैक्ट्रानिक वोटिंग मशीन को कैसे हैक किया जा सकताहै इसका बाकायदा प्रदर्शन किया गया.प्रिंस्टन के कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर Edward Felten ने एक मालवेयर लगाकर बताया कि बिना मशीन को छुए या उसके पास गए मशीन के मेमोरी कार्ड पर वोटों की संख्या को बदला जा सकता था. ये मॉलवेयर एक ऐसा वायरस अपने आप तैयार कर लेता था जो अपने आप एक मशीन से दूसरी मशीन तक चला जाता था. 4. क्या गड़बड़ी होने पर जांच संभव है? जी नहीं. वोटिंग मशीन की इस बात के लिए पिछले 10 साल से ज्यादा आलोचना होती रही है क्योंकि इसमें पड़ने वाले वोटों का ऑडिट नहीं किया जा सकता. मतलब एक बार डाटा चला गया फिर आप कुछ नहीं कर सकते 5. मशीन का गुप्त ज्ञान ईवीएम में अंदर क्या है इसका पता लगाया ही नहीं जा सकता. एक्सपर्ट लगातार मांग करते रहे हैं कि ईवीएम का सॉफ्टवेयर सबको उपलब्ध होना चाहिए ताकि वो जांच कर सकें कि कहीं गड़बड़ तो नहीं है. दर असल चुनाव आयोग को इन सभी सवालों के सिलसिलेवार तार्किक खंडन करने चाहिए थे. जिनका उत्तर नहीं मिल सकता था उसका हैकाथॉन ही रास्ता था लेकिन आयोग भागता रहा. उसने एक फॉर्मेलिटी की और पल्ला झाड़ लिया लेकिन सवाल जहां थे वहां रह गए.