किस काम का है करोना पैकेज, छूट जाएंगे ज़रूरत मंद

केंद्र सरकार ने कोरोनावायरस से लड़ाई के बीच देश के लिए आर्थिक राहत पैकेज का ऐलान कर दिया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, 1 करोड़ 70 लाख रुपए के इस पैकेज में कमजोर तबके का ध्यान रखा गया है. खासकर किसानों, महिलाओं, निर्माण कार्य से जुड़े लोगों, वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और दिव्यांगों का. हालांकि, इतने बड़े वर्ग के लिए भी सरकार का राहत पैकेज भारत की जीडीपी का महज 1% ही है.

आर्थिक राहत पैकेज में चिंता की बात सिर्फ इसका आकार नहीं, बल्कि यह भी है कि असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी, जिन्होंने लॉकडाउन के चलते अपनी नौकरी और तनख्वाह दोनों खोई हैं, उन्हें कितनी जल्दी इसका फायदा मिलता है. वह भी ऐसे समय जब इस वर्ग पर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का सबसे ज्यादा खतरा है. इस लिहाज से केंद्र सरकार का पैकेज केरल के राहत पैकेज से भी देरी से आया है.

केरल सरकार ने पिछले हफ्ते ही लोगों को आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए 20,000 करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, तेलंगाना और राजस्थान ने भी राहत पैकेज की घोषणाएं शुरू कीं. इस आर्थिक पैकेज में अभी यह साफ नहीं है कि सरकार ने असंगठित क्षेत्र के कर्मियों के लिए क्या योजनाएं तैयार की हैं. मसलन धोबी, रिक्शावालों, नाई और ग्रामीण कामगारों के लिए जो कई बार राज्य सरकार के साथ रजिस्टर्ड नहीं होते.

इसके अलावा निर्माण कार्यों से जुड़े कर्मी जो राज्य सरकार से नहीं जुड़े हैं, उन्हें कैसे फायदा मिलेगा यह अभी तय नहीं है. एक दशक पहले असंगठित क्षेत्र के कर्मियों की संख्या करीब 47.41 करोड़ आंकी गई थी. पॉलिसी एक्सपर्ट्स को चिंता है कि आखिर सरकार उन कर्मियों को कैसे ढूंढ कर फायदा पहुंचाएगी, जो काम छोड़कर सैकड़ो किलोमीटर का सफर कर अपने घर की ओर निकल गए हैं. (जनसत्ता डॉट कॉम से साभार)