ऐसे रखी गई सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बुनियाद

सुप्रीम कोर्ट राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में शनिवार (9 नवंबर 2019) को फैसला सुनाएगा. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड़़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ शनिवार की सुबह साढ़े 10 बजे यह फैसला सुनाएगी. संविधान पीठ ने 16 अक्ट्रबर को इस मामले की सुनवाई पूरी की थी. पीठ ने छह अगस्त से लगातार 40 दिन इस मामले में सुनवाई की.

आपको बताते हैं कि इस सुनवाई के दौरान कब क्या हुआ.

पहला दिन

6 अगस्त को शुरू हुई रोजाना सुनवाई के पहले दिन निर्मोही अखाड़ा ने 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर अपना दावा किया था. उन्होंने कहा कि पूरी विवादित भूमि पर 1934 से ही मुसलमानों को प्रवेश की मनाही है.

दूसरा दिन

सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े से जानना चाहा कि विवादित स्थल पर अपना कब्जा साबित करने के लिए क्या उसके पास कोई राजस्व रिकॉर्ड और मौखिक साक्ष्य है. इस पर निर्मोही अखाड़े ने कहा कि साल 1982 में डकैती हुई थी, जिसमें हमने सारे रिकॉर्ड खो दिए.

तीसरा दिन

संविधान पीठ ने पूछा कि एक देवता के जन्मस्थल को न्याय पाने का इच्छुक कैसे माना जाए, जो इस केस में पक्षकार भी हो. वकील ने कहा, हिंदू धर्म में किसी स्थान को पवित्र मानने और पूजा करने के लिए मूर्तियों की जरूरत नहीं है.

सातवां दिन

राम लला विराजमान की ओर से दलील दी गई कि विवादित स्थल पर देवताओं की अनेक आकृतियां मिली हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन ने संविधान पीठ के समक्ष अपनी दलीलों के समर्थन में विवादित स्थल का निरीक्षण करने के लिए अदालत द्वारा नियुक्त कमिश्नर की रिपोर्ट के अंश पढ़े.

16वां दिन

अयोध्या मामले में हुई सुनवाई में उच्चतम न्यायालय ने शिया बोर्ड के वकील को भी सुना. इस दौरान शिया बोर्ड ने कहा कि हमने इमाम तो सुन्नी रखा लेकिन मुतवल्ली हम ही थे. पीठ ने वकील से सवाल किया कि जब 1946 में उनकी अपील खारिज हो गई थी तो उन्होंने अपील क्यों नहीं की. धींगरा ने कहा कि हम डरे हुए थे.

19वां दिन

मुस्लिम पक्षकारों ने दलील दी कि लगातार नमाज ना पढ़ने और मूर्तियां रख देने से मस्जिद के अस्तित्व पर सवाल नहीं उठाए जा सकते. मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यह सही है कि विवादित ढांचे का बाहरी अहाता शुरू से निर्मोही अखाड़े के कब्जे में रहा है.

24वां दिन

अयोध्या मामले की सुनवाई के 24वें दिन मुस्लिम पक्षकारों के वकील ने कहा है कि जन्मस्थान कानूनी व्यक्ति नहीं है. वहीं, हिंदू पक्षकार की ओर से आस्था और विश्वास के साथ-साथ जन्मस्थान और जन्मभूमि को लेकर दलील दी गई.

27वां दिन

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्षकारों की पैरवी करने पर अधिवक्ता राजीव धवन को आपत्तिजनक पत्र लिखने वाले 88 वर्षीय सेवानिवृत्त लोकसेवक के खिलाफ अवमानना का मामला बंद कर दिया. पीठ ने धवन को आगाह किया कि भविष्य में इस तरह की हरकत की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए.

31वां दिन

अयोध्या में खुदाई के बाद हिंदू मंदिरों के प्रमाण होने की संबंधी पुरातत्व विभाग (एएसआई) की रिपोर्ट पर सवाल उठाने पर उच्चतम न्यायालय ने सुन्नी बोर्ड को फटकारा और कहा वह इस रिपोर्ट पर सवाल नहीं उठा सकते.

36वां दिन

मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली पांच जजों की पीठ ने रामजन्मस्थान पुनरोद्धार समिति को नया तथ्य रखने से रोक दिया. पीठ ने कहा, भरोसा रखिए, हम ऐसा फैसला देंगे जिसे हमें देने की जरूरत है.

39वां दिन

कोर्ट ने कहा कि हिन्दू और मुस्लिम के पास विवादित स्थल के टाइटल के ठोस और पर्याप्त सबूत नहीं हैं. ऐसे में क्या भूमि किसी तीसरे पक्ष यानी सरकार को जमीन दी जा सकती है.

40वां दिन

उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई पूरी कर ली और कहा, फैसला बाद में सुनाएगा.

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