एक पत्रकार का मोदी समर्थकों से पूछा- सवाल पूछने में गलत क्या है?

हमें आप ट्रोल करके चुप करा दोगे. लेकिन देश की इज्जत दुनिया के सामने हमारे बोलने से तय नहीं होगी. वो आपके या हमारे कहने से आलू को भालू तो नहीं मानेंगे. जो प्रश्न हमारे मन में आ रहे हैं वो हमारा अविस्कार नहीं है. वो परिस्थितियों से आए हैं. हमारे सवाल का जवाब उन बहुत से सवालों को शांत कर सकता है जो दिमागों में तो हैं लेकिन जुबान पर नहीं हैं. आप कह सकते हो कि कोई सबूत मांग रहा है इसलिए विरोधी है. वो आपकी पार्टी का विरोधी है लेकिन सबूत नहीं तो तर्क दोगे तो देश मजबूत होगा. सवाल और उसके जवाब में आए तर्क ही सच को पैदा करते हैं, एकालाप नहीं. सवाल उठ रहे हैं तो कम से कम ये तो पता है कि देश नहीं कुछ लोग गलत हैं. ये देश कभी गलत नहीं करता व्यक्ति ही गलत करते हैं. व्यक्तियों से पूछे गए सवाल आंतरिक होते हैं लेकिन बाहर से जब कोई सवाल उठेगा तो देश पर उठेगा . व्यक्ति पर नहीं उठेगा इसलिए देश के हर नागरिक को समझाना आपका धर्म है कि उस सवाल का क्या जवाब दें. जब मेरे मन का सवाल ही अनुत्तरित है तो बाहर क्या उत्तर दूं. मत भूलो कि सवाल सिर्फ यूएन में नहीं पूछे जाते.

ये भी पढ़ें :  ' पाक परमाणु बम से हो सकते हैं आतंकवादी हमले' अमेरिकी हैकर्स ने निकाली रिकॉर्डिंग

आजतक के पत्रकार गिरिजेश वशिष्ठ का लेख

Spread the love

Leave a Reply