अगर मोदी की जीत पक्की है तो नेता पार्टी से भाग क्यों रहे हैं

जैसा कि मोदी समर्थकों का विश्वास है और पार्टी का दावा है कि वो फिर से प्रधानमंत्री बनकर आ रहे हैं तो ऐसा क्या है कि जीतने वाली पार्टी को उसके अहम नेता छोड़ रहे हैं. इसमें भी सबसे ज्यादा नुकसान वहां हो रहा है जहां के भरोसे पार्टी बैठी है.

खुद बीजेपी समर्थक ये मानते हैं कि यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार , हरियाणा, छत्तीसगढ़, दिल्ली, उत्तराखंड समेत कई राज्यों की 171 सीटों में से पार्टी को बड़ा हिस्सा खोना पड़ सकता है. 2014 में इन राज्यों में पार्टी के पास 100% सीटें थीं.

लेकिन इन विश्लेसकों का मानना है कि इस नुकसान की भरपाई नॉर्थ ईस्ट से होगी लेकिन ये खबर नॉर्थ ईस्ट से हैं और वहां से दो दिन में 23 बड़े नेता बीजेपी छोडकर जा चुके हैं.

अकेले अरुणाचल प्रदेश में दो मंत्रियों और छह विधायकों समेत 20 नेताओं ने मंगलवार को बीजेपी छोड़कर नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) का दामन थाम लिया.

गृह मंत्री कुमार वाई, पर्यटन मंत्री जरकार गामलिन, बीजेपी महासचिव जरपुम गामबिन समेत विधायकों के पार्टी छोड़ एनपीपी में जाने से अब राज्य विधानसभा में एनपीपी के विधायकों की संख्या 13 हो गई है.

हालांकि 60 सदस्यीय विधानसभा में अब भी बीजेपी के पास 40 विधायकों का समर्थन हासिल है. बीते रविवार को ही बीजेपी ने राज्य विधानसभा के लिए 54 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी.

अरुणाचल प्रदेश में 11 अप्रैल को दो लोकसभा सीटों के साथ ही विधानसभा चुनाव के लिए भी वोट डाले जाएंगे.

ईटानगर में मीडिया को संबोधित करते हुए एनपीपी के महासचिव थॉमस संगमा ने कहा कि एनपीपी अब 60 सदस्यीय विधानसभा में कम से कम 30-40 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की कोशिश करेगी.

उन्होंने कहा, “यदि सभी सीटों पर जीत दर्ज करते हैं तो हम अपनी सरकार बनाएंगे.”

अरुणाचल प्रदेश विधानसभा

मणिपुर, मेघालय में भी बीजेपी सरकार में है एनपीपी

फ़िलहाल राज्य में एनपीपी और बीजेपी के गठबंधन की सरकार है. एनपीपी पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन का भी सदस्य है लेकिन दोनों पार्टियां आगामी लोकसभा में एक साथ नहीं उतर रही हैं.

एनपीपी मणिपुर में भी बीजेपी नीत सरकार में गठबंधन में है. नगालैंड में भी यह बीजेपी और एनडीपीपी के नेतृत्व वाली सरकार का हिस्सा है.

उधर त्रिपुरा के बीजेपी उपाध्यक्ष सुबल भौमिक समेत बीजेपी के तीन नेता मंगलवार को कांग्रेस में शामिल हो गए. कांग्रेस में शामिल हुए दोनों नेता पूर्व मंत्री हैं.

कांग्रेस में शामिल होने के बाद भौमिक ने कहा कि कुछ लोग उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए टिकट दिए जाने के ख़िलाफ़ हैं.

उन्होंने कहा, “मैं उस पार्टी पर बोझ नहीं बनना चाहता जहां आंतरिक लोकतंत्र नहीं है. इसलिए मैंने कांग्रेस में वापस जाने का फ़ैसला किया है.”

1970 के दशक के अंत से भौमिक कांग्रेस में थे. कांग्रेस के टिकट पर 2008 में वो विधायक बने. 2013 में राज्य विधानसभा में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने अपनी पार्टी प्रगतिशील ग्रामीण कांग्रेस के गठन के लिए कांग्रेस को छोड़ा. हालांकि 2014 में वो बीजेपी में शामिल हो गए थे.

पूर्वोत्तर में राहुल ने क्या कहा?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शुक्रवार को त्रिपुरा में थे और इस दौरान उन्होंने जमकर मोदी सरकार पर हमला बोला.

राहुल गांधी ने कहा, “हम जानते हैं कि यहां पर अलग-अलग तरह की कठिनाइयां हैं, इसलिए कांग्रेस की सरकार ने अरुणाचल को विशेष राज्य का दर्जा दिया था, सिर्फ़ दर्जा ही नहीं दिया था, बल्कि दिल से रिश्ता जोड़ा था. जो स्पेशल स्टेटस छीना गया है, उसे हम लागू करेंगे. जैसे ही केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनेगी हम यह फ़ैसला लेंगे.”

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “फैसले लेने से पहले अरुणाचल से पूछा जाना चाहिए कि आख़िर वह क्या चाहता है. उन्होंने कहा कि मेरा यह मानना है कि फ़ैसले राज्य के हिसाब से होने चाहिए.

उन्होंने आगे कहा, “बीजेपी पूर्वोत्तर की संस्कृति को बर्बाद करना चाहती है. यह बीजेपी और आरएसस की सोच है. जो लोग आरएसएस से जुड़े हैं, उन्हें विश्वविद्यालयों में जगह दी जा रही है. आरएसएस के लोगों को कुलपति बनाया जा रहा है.” इनपुट बीबीसी से भी